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प्रदूषण से कैंसर के बढ़ते खतरों को रोकने की चुनौती -डॉ. रमेश ठाकुर

आमजन में अक्सर यह धारणा रही है कि कैंसर मुख्यतः तंबाकू, खैनी-गुटखा या शराब के सेवन से ही होता है। पर, कैंसर अब इन वजहों तक सीमित नहीं रहा। इस खतरनाक बीमारी ने बड़ा विस्तार ले लिया है। अब प्रदूषण के चलते भी कैंसर काफी संख्या में होने लगा है। वायु प्रदूषण से सिर्फ अस्थमा, हृदय संबंधी रोग, स्किन एलर्जी …

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चुनावी चकल्लस में रेवड़ियों के साथ-साथ जोड़ियों की चर्चा-अजय बोकिल

मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में इस बार रेवडि़यों के साथ राजनीतिक जोड़ियों को लेकर भी खूब बवाल मचा है। बात ‘शोले’ के ‘जय- वीरू’ से शुरू होकर मेरे अपने के श्याम- छेनू से होते हुए ‘गब्बरसिंह और सांभा’ तक पहुंची। इस जोडि़यों का जिक्र कभी राजनीतिक विरोधियों का चरित्र उजागर करने तो कभी सियासी संदर्भ में अपनी अटूट मैत्री जताने …

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असुरक्षित हो गई बेटियां कब रुकेंगें अत्याचार-नरेन्द्र भारती

देश में बेटियां हर जगह असुरक्षित महसूस कर रही हैं। बेटियों की सुरक्षा के दावे कहां है। यह एक यक्ष प्रशन है यह सुलगते प्रशन है कि बेटियां कब सुरक्षित होगी। ताज़ा घटनाक्रम वाराणसी में घटित हुआ है जहाँ बीएचयू परिसर कुछ गुंडों द्वारा एक लड़की के साथ अश्लील हरकते करना व और वीडियो बनाना की घटना सामने आई हैl …

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आटा ले लो आटा ,मोदी ब्रांड सस्ता आटा-राकेश अचल

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच केंद्र सरकार ने सस्ता आटा,सस्ती दाल लांच कर एक नेक काम किया है। सरकार की ये जनकल्याणकारी योजना है क्योंकि देश में अब एक तरफ अडानी का फार्च्यून आटा आम जनता का खून पी रहा है तो दूसरी तरफ अडानी दाल। ऐसे में अडानी के कान खींचने के बजाय सरकार ने अपनी ही …

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संविधान की धज्जियाँ ‘राजनीति’ में धर्म का प्रवेश शीर्ष स्तर-ओमप्रकाश मेहता

क्या आजादी के पचहत्तर साल बाद भी देश के नामचीन राजनीतिक दल मतदाताओं का मनोविज्ञान समझ नहीं पाए है और इसीलिए आज भी उसी पुराने ढर्रे से चुनाव जीत हासिल करना चाहते है? आज यह सवाल इसलिए सहज रूप से सामने आ रहा है, क्योंकि राजनीतिक दल और उसके ‘‘सर्वगुण सम्पन्न’’ नेता अभी भी भारत के मतदाताओं को ‘धर्मभिरू’ ही …

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