क्या जैतून के तेल का सेवन करने से डिमेंशिया से मरने का खतरा कम हो सकता है? जी हां कम हो सकता है और यह दावा हम नहीं कर रहे, बल्कि एक रिसर्च में ऐसा कहा गया है कि डिमेंशिया से जुड़े जोखिम को कम करने में जैतून का तेल आपकी काफी मदद कर सकता है.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के एक विश्वसनीय सोर्स के मुताबिक, दुनियाभर में साढ़े पांच करोड़ लोगों को डिमेंशिया की बीमारी है. डिमेंशिया के हर साल एक करोड़ से ज्यादा नए मरीज सामने आते हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बुजुर्गों में डिमेंशिया मौत का 7वां सबसे प्रमुख कारण है.
28% तक कम हो जाता है खतरा!
डिमेंशिया का प्रमुख रूप अल्जाइमर डिजीज है, जो अमेरिका में 65 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 67 लाख लोगों को अपना शिकार बनाता है. एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, नई रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग आधे चम्मच जैतून के तेल का सेवन रोजाना करते हैं, उनमें डिमेंशिया से मरने का खतरा 28 प्रतिशत तक कम हो जाता है.
इस रिसर्च में दिल की बीमारी और कैंसर से निजात पाने वाले 31,801 पुरुषों और 60,582 महिलाओं के 1990-2018 तक के हेल्थ रिकॉर्ड का एनालिसिस किया गया है. इन लोगों की हेल्थ पर 28 सालों तक नजर रखी गई.
डिमेंशिया के रोगियों के लिए जैतून तेल कितना फायदेमंद?
इस रिसर्च के रिजल्ट इस हफ्ते न्यूट्रिशन 2023 कॉन्फ्रेंस में पेश किए जाएंगे. टेंपल यूनिवर्सिटी में अल्जाइमर सेंटर के डायरेक्टर और प्रोफेसर डोमेनिको प्रेटिको ने बताया कि ओलेयूरोपिन और ओलेओकैंथल जैसे कंपाउंड्स को फायदेमंद माना जाता है. जैतून के तेल में कुछ ऐसे तत्व हैं, जो डिमेंशिया से मरने के रिस्क को कम करने में मददगार हैं.
रोजाना कितनी मात्रा में जैतून के तेल का सेवन करना चाहिए?
डॉ. प्रेटिको की मानें तो डिमेंशिया से बचने के लिए रोजाना दो चम्मच जैतून के तेल का सेवन करना चाहिए. हालांकि अलग-अलग लोगों में इसकी जरूरत 1 चम्मच से लेकर 5 चम्मच तक हो सकती हैं. ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए पीड़ित लोग 3 बड़े चम्मच जैतून के तेल का सेवन कर सकते हैं.
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