भारत के पश्चिमी सिरे पर स्थित कच्छ के रण का प्रवेश द्वार धोर्डो शुक्रवार को गणतंत्र दिवस परेड में गुजरात की झांकी का मुख्य आकर्षण रहा।
धोर्डो ने पिछले साल संयुक्त राष्ट्र की सर्वश्रेष्ठ गांवों की सूची में जगह बनाई थी।
झांकी ने इस सीमावर्ती गांव को गुजरात के पर्यटन विकास के वैश्विक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
कच्छ के रण के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाने वाला धोर्डो अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक संगीत और वार्षिक रण उत्सव के लिए खास तौर पर चर्चित है।
धोर्डो परंपरा, पर्यटन और प्रौद्योगिकी का एक अनूठा मिश्रण प्रदर्शित करने वाला स्थान है तथा ‘विकसित भारत’ के सार को परिभाषित करता है।
हाल ही में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) द्वारा इसे सांस्कृतिक विरासत घोषित किया गया है। इसकी झलक झांकी में स्पष्ट नजर आई जिसमें धोर्डो के पारंपरिक ‘भंगा’ मकान, स्थानीय हस्तशिल्प, रोंगन कला, तंबू शहर आदि को दिखाया गया।
गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में जब झांकी कर्तव्य पथ पर निकाली गई तो पारंपरिक पोशाक पहने महिलाओं ने गरबा खेला।
झांकी में पारंपरिक पोशाक में एक विदेशी पर्यटक को डिजिटल भुगतान करते हुए दिखाया गया है, जो सीमावर्ती गांव में तकनीकी प्रगति का प्रतीक है।
– एजेंसी
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