सुंदर अट्रैक्टिव दिखने में बालों की बड़ी भुमिका होती है.सिल्की शाइनी बाल लुक में चार चांद लगा देते हैं. ऐसे में इन दिनों महिलाओं में हेयर स्ट्रेटनिंग का क्रेज देखने को मिल रहा है.वैसे तो हेयर स्ट्रेटिंग दो तरह के होते है एक टेम्पोरेरी और दूसरा परमानेंट…टेम्पोरेरी कुछ ही वक्त के लिए होता है जैसे ही आप शैम्पू करती हैं ये स्ट्रेटनिंग चला जाता है, लेकिन परमानेंट स्ट्रेटनिंग सालों के लिए होता है..इससे बाल खूबसूरत, मैनेजेबल और स्टाइलिश लगते हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि ये स्टाइल आपके लिए जानलेवा भी हो सकता है.
हाल ही में हुए एक स्टडी में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि बाल सीधा करने के लिए लगाई जाने वाली क्रीम में मिले रसायन गर्भाशय के कैंसर के जोखिम को दोगुना कर सकते हैं.ऐसे में जो महिलाएं अक्सर केमिकल हेयर स्ट्रेटनिंग कराती हैं उन्हें यूटेराइन यानू गर्भाशय का कैंसर होने का खतरा अधिक रहता है.
स्टडी में हुआ खुलासा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा किए गए अध्ययन के दौरान अमेरिका में 33 हजार महिलाओं की एक दशक से अधिक समय तक नगरानी की गई, इन सभी महिलाओं की उम्र 35 से 74 साल के बीच थी.शोधकर्ताओं ने बताया कि साल में चार या उससे ज्यादा बार हेयर स्ट्रेटनिंग उत्पादों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में गर्भाशय कैंसर के दर 4.05 फीसदी थी, जबकि ऐसा ना करने वाली महिलाओं में 1.64 फीसदी थी.
गर्भाशय कैंसर के लक्षण
वजन घटना
पेट और पैरों में दर्द
अनियमित पीरियड्स
बदबूदार डिस्टार्ज
यूरिन में परेशानू
यूरिन में ब्लड आना
कमजोरी
क्या कहते हैं आंकड़े
आपको बता दें कि दुनिया भर में करीब 5 लाख महिलाएं हर साल गर्भाशय के कैंसर से पीड़ित होती है, 85 फ़ीसदी महिलाओं को विकासशील देशों में गर्भाशय कैंसर का जोखिम होता है 30 से 59 साल की उम्र के बीच भारत में 36 फ़ीसदी महिलाओं को गर्भाशय कैंसर से पीड़ित होने का खतरा रहता है.आपको बता दें कि स्टडी यह भी कहती है कि यह कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में आसानी से फैल सकता है, जो महिलाएं साल में 4 बार से अधिक केमिकल हेयर स्ट्रेटनर का उपयोग करती हैं उनमें गर्भाशय का कैंसर होने के लक्षण पाए जा सकते हैं.
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