जल ही जीवन है. ये स्लोगन आपने दीवार और बोर्ड पर लिखा देखा होगा. इस स्लोगन का बड़ा महत्व है. जल की वेल्यू इसी से समझी जा सकती है कि दिनभर में जितने जहरीले तत्व यानि टॉक्सिंस बॉडी में जाते हैं. पानी इन्हीं टॉक्सिंस को बाहर निकालने का काम करता है. लेकिन पानी पीना क्या हमेशा फायदेमंद ही होता है या इसके नुकसान भी है. लोग रात का रखा हुआ पानी सुबह में उठकर पीते हैं. सुबह का पानी शाम तक पीते रहते हैं. यह फायदा पहुंचाता है या नहीं. यही जानने की कोशिश करते हैं कि रखे हुए पानी में आखिर बदलाव क्या आता है?
रखे हुए पानी में क्या बदलाव आते हैं?
अकसर लोग रात को पानी भरकर रख लेते हैं और सुबह तक पीते रहते हैं. कई बार रात का रखा हुआ पानी सुबह में पीते हैं. लेकिन क्या आपने महसूस किया है कि जिस नल या फिल्टर से उस पानी को लेकर आ रहे हैं. रखे हुए पानी के स्वाद में बदलाव देखने को मिलता है. स्टडी में सामने आया है कि पानी को 12 घंटे या उससे अधिक रखने पर उसमें आणविक चेंज आने लगते हैं. हवा में कार्बनडाई ऑक्साइड मिलना शुरू हो जाता है. हवा में कार्बन डाइऑक्साइड इसके साथ मिलना शुरू हो जाती है. इससे पीएच मान में कमी देखने को मिलती है. इससे टेस्ट में बदलाव आ सकता है.
किस तरह पहुंचाता है नुकसान?
खुला पानी पीना सुरक्षित नहीं माना जाता है. लंबे समय तक खुले गिलास वाला पानी रखा होने पर इसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. जैसे ही हम पानी का घूंट पीते हैं तुरंत ही गिलास के रिम पर बैठे बैक्टीरिया बॉडी में प्रवेश कर जाते हैं. यह बॉडी के आर्गन को नुकसान पहुंचा सकते हैं. जिसके साथ इस पानी को शेयर करोगे. उसे भी नुकसान होने की संभावना है.
कितना सेफ, शोध जारी
स्पष्ट तौर पर इस तरह की कोई रिसर्च अभी तक सामने नहीं आई है, जिससे यह पुष्टि हो सके कि रखा हुआ पानी कितना सेफ और कितना नहीं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को रखा हुआ पानी पीने से बचना चाहिए. यह सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है.
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