बवासीर (पाइल्स) एक आम लेकिन बेहद कष्टदायक समस्या है, जिसमें मल द्वार पर सूजन, जलन, दर्द और कभी-कभी खून आना जैसी परेशानियाँ होती हैं। बाज़ार में मिलने वाली दवाइयाँ कभी-कभी अस्थायी राहत देती हैं, लेकिन आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय लंबे समय तक असर दिखा सकते हैं। ऐसा ही एक प्राकृतिक उपाय है – अर्कमर (सोनपत्ती या पीले फूल वाला पौधा)।
कौन सा है यह पीला फूल?
यह पीला फूल आमतौर पर सोनमुखी, अर्कमर, या सेनपत्ता के नाम से जाना जाता है। यह एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है जिसकी पत्तियाँ और फूल दोनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसके फूलों में मौजूद तत्व पाचन सुधारते हैं, कब्ज दूर करते हैं और मल को मुलायम बनाकर बवासीर में राहत पहुंचाते हैं।
कैसे करता है यह फूल बवासीर में काम?
- इसमें प्राकृतिक रेचक (laxative) गुण होते हैं, जो कब्ज को दूर करते हैं – बवासीर का प्रमुख कारण।
- सूजन और जलन को कम करता है।
- रक्तस्राव वाले बवासीर में भी लाभकारी माना गया है।
- यह पाचन क्रिया को संतुलित करता है जिससे मल त्याग में आसानी होती है।
कैसे करें इसका इस्तेमाल?
1. फूलों का काढ़ा बनाकर सेवन करें:
- 4-5 पीले फूल लें और एक गिलास पानी में उबालें।
- जब पानी आधा रह जाए, तो छानकर गुनगुना पी लें।
- इसे दिन में एक बार, रात को सोने से पहले लें।
2. फूलों का पाउडर:
- सूखे फूलों को पीसकर चूर्ण बना लें।
- 1 चम्मच चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।
- इसे नियमित रूप से लेने से कब्ज में राहत और बवासीर में सुधार देखा जा सकता है।
3. बाहरी प्रयोग:
- फूलों को पीसकर पेस्ट बना लें।
- प्रभावित स्थान पर लगाने से जलन और सूजन में आराम मिलता है।
क्या रखें सावधानी?
- गर्भवती महिलाएं या बहुत छोटे बच्चे इसका सेवन न करें।
- लगातार उपयोग से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
- अत्यधिक मात्रा में सेवन से दस्त हो सकते हैं।
बवासीर जैसी समस्या में दवाओं के साथ घरेलू उपाय भी सहायक हो सकते हैं, बशर्ते उन्हें सही तरीके से अपनाया जाए। पीले फूल वाला यह पौधा, जिसका उपयोग आयुर्वेद में वर्षों से होता आया है, एक प्रभावी, सस्ता और सरल उपाय हो सकता है। नियमित और संतुलित उपयोग से बवासीर की समस्या से राहत पाई जा सकती है।
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