जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में हो रही ‘बैंगनी क्रांति’ को शुक्रवार को गणतंत्र दिवस परेड में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की झांकी में महत्पपूर्ण स्थान मिला।
सीएसआईआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया ‘बैंगनी क्रांति’ भारत की वैज्ञानिक शक्ति और भद्रवाह व आसपास के क्षेत्रों के उन किसानों की मेहनत की भावना को प्रदर्शित करती है, जो पिछले कुछ वर्षों में उद्यमी बन गए हैं।
लैवेंडर के फूलों से सजी मनमोहक झांकी जम्मू में सीएसआईआर-‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन’ में लैवेंडर की एक विशिष्ट किस्म के विकास, इसकी खेती और तेल, इत्र एवं अगरबत्ती बनाने के लिए इसके प्रसंस्करण की कहानी बयां कर रही थी।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने अक्सर ‘बैंगनी क्रांति’ को लैवेंडर को प्रयोगशाला से बाजार तक ले जाने और भारत में कृषि-स्टार्टअप की एक नई संस्कृति को विकसित करने के एक उदाहरण के तौर पर पेश किया है।
सीएसआईआर की झांकी में सीएसआईआर तथा ‘सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, दुर्गापुर’ द्वारा विकसित भारत के पहले महिला-अनुकूल कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का भी प्रदर्शन किया गया।
झांकी में लैवेंडर के फूलों से तेल निकालने की इकाई को भी प्रदर्शित किया गया।
लैवेंडर तेल कम से कम 10,000 रुपये प्रति लीटर की दर से बिकता है।
– एजेंसी
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