स्किन टैग या मस्से आमतौर पर बूढ़े-बुजुर्गों की त्वचा पर होते हैं. हालांकि आजकल ये युवाओं के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर भी देखे जा रहे हैं. स्किन टैग को मेडिकल टर्म में एक्रोकॉर्डन्स कहा जाता है. ये टैग लाल या फिर हल्के भूरे रंग के होते हैं. वैसे तो स्किन टैग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होते, लेकिन देखने में भद्दे जरूर नजर आते हैं. टैग्स आमतौर पर गर्दन, बगल, पीठ, छाती और कमर की सिलवटों जैसे हिस्सों पर दिखाई देते हैं. दरअसल, लूज़ कोलेजन फाइबर स्किन के मोटे हिस्सों के नीचे फंस जाते हैं, जो मस्से के रूप में त्वचा पर उभरते हैं.
एक न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, एक डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया कि स्किन टैग को हटाने के लिए घरेलू उपचार उतने सफल साबित नहीं होते. ओवर-द-काउंटर क्रीम और सर्जिकल प्रोसेस सहित कई तरीकों से इन्हें हटाया जा सकता है. स्किन टैग के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी का इलाज बेहतर साबित होता है. इसमें सर्जन स्किन टैग को जलाने और ब्लीडिंग को रोकने के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी के जरिए हीट देते हैं. इसके अलावा, एक और इलाज है जिसे क्रायोसर्जरी के नाम से जाना जाता है.
इलैक्ट्रोसर्जरी/कॉटराइजेशन को इलेक्ट्रिक करंट का इस्तेमाल करके अंजाम दिया जाता है. इस प्रोसेस में करंट की हीट स्किन टैग से गुजरती है, जिसके प्रभाव से मस्से रिमूव हो जाते हैं. इस सर्जरी के बाद टैग के बेस को काटने के लिए कैंची का इस्तेमाल किया जाता है. ये लोकल एंथेसिया के तहत किया जाता है और सबसे जरूरी बात कि ये डायबिटीज से पीड़ित लोगों और ब्लड थिनर्स लेने वाले लोगों के लिए सुटेबल नहीं है. इस प्रोसेस में सर्जन स्किन टैग को सर्जिकल धागे से बांध देता है, ताकि मस्से को होने वाली ब्लड की सप्लाई रुक जाए. इसके प्रभाव से टैग सूख जाते हैं और एक या दो दिन में अपने आप गिर जाते हैं. इसके अलावा, लेजर सर्जरी भी होती है, जो टैग को गर्म करके इसे रिमूव कर देती है.
स्किन टैग को रिमूव करना कोई मुश्किल काम नहीं है. हालांकि टैग्स के हटने के बाद स्किन को ड्राई और क्लीन रखना चाहिए. अगर डॉक्टर ने टांके लगाए हैं तो आपको उनके द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन चाहिए.
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