चाहे बालों का झड़ना हो, गंजापन हो या बालों का पतला होना कई कारणों से हो सकता है. कभी-कभी बालों का झड़ना एक स्वास्थ्य समस्या का एक साइड इफेक्ट होता है. अगर आप पतले बालों या गंजेपन से जूझ रहे हैं,
पुरुषों और महिला दोनों में बालों के झड़ने के कारण अलग-अलग हैं. पुरुषों में ये अधिकतर आनुवांशिक होता है. पुरुषों में गंजेपन को मेल पेटर्न बोल्डनेस भी कहा जाता है. ज्यादातर मामलों में पिता, दादा, मामा या नाना की साइड से आनुवांशिक होता है और उनके बाल झड़ने लगते हैं जैसे वे 20 साल की उम्र को पार करते है. कभी कभी लेट होता है और 30 से 35 साल की उम्र में गंजापन शुरू हो जाता है. किसी किसी को यही गंजा बहुत देरी से होता और जैसे 40 या 45 साल की उम्र में. गंजापन पुरुषों को तीन एरिया में इफेक्ट करता है. इसमें फ्रंट, मिड और बैक शामिल है.
डॉक्टर कहती हैं कि महिलाओं में बालों के झड़ने का सबसे आम कारण पोषक तत्वों की कमी है. इसमें प्रोटीन, कैल्शिय और कई और न्यूट्रिएंट शामिल हैं. इसके साथ ही अन्य कारणों में तनाव-चिंता, इमोशनल स्ट्रेस, बालों को टाइट से बांधने से भी जड़ों को नुकसान पहुंचता है उस वजह से भी बाल झड़ते हैं, बालों में बहुत सारा केमिकल और हीटिंग इक्विपमेंट्स के इस्तेमाल से भी बाल झड़ना शुरू हो जाते हैं. इसके साथ ही महिलाओं में कम्पलीट गंजेपन की बजाय बालों के पतलेपन की समस्या बहुत ज्यादा देखी जाती है.
बालों में कीड़ा लगना क्या है? जिसमें बाल एक जगह से हट जाते हैं
डॉक्टर कहती हैं कि इस कंडिशन को एलोपेसिया एरीटा कहा जाता है. ये एक कॉमन प्रोब्लम है. वास्तव में ये बालों में कोई इंफेक्शन या कीड़ा नहीं है. दरअसल ये हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता या इम्यून सिस्टम हमारे ही हेयर फॉलिकल्स को नष्ट करने लगता है. इस कंडिशन में हमारे शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी हमारी प्रोटेक्शन करने की बजाय बालों की स्कैल्प को ही नष्ट करने लगती हैं. इससे स्कैल्प पर सर्कुलर पैच बन जाता है. इस समस्या का इलाज भी बहुत आसानी से किया जा सकता है.
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