मोटा अनाज को एक दिवस के रूप में मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. वर्ष 2023 को मोटा अनाज दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि मोटा अनाज भारत में पहले काफी उगाया जाता था. प्राचीन सभ्यताओं में इसके प्रमाण मिले हैं. भारत ने वर्ष 2018 को मोटा अनाज के लिए राष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया गया था. केंद्र सरकार राज्य के सहयोग से मोटा अनाज की खपत को प्रोत्साहित कर रही है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आईसीआरआईएसएटी में स्मार्ट फूड इनिशिएटिव के नेतृत्व में किए गए शोध अध्ययन में पाया गया कि मधुमेह वाले जो लोग हर दिन बाजरा खाते हैं. उनके ब्लड में शुगर लेवल में 12 से 15 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. शोधकर्ताओं ने कहा कि बाजरे के सेवन से मधुमेह रोगियों का ब्लड शुगर लेवल अन्य रोगियों की अपेक्षा कम पाया गया. प्री-डायबिटिक व्यक्तियों के मामले में एचबीए1 सी 17 प्रतिशत तक कम हो गया और सामान्य स्तर पर वापस आ गया. यह रिपोर्ट फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन में प्रकाशित हुई थी.
विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमेह रोगियों के लिए भोजन की उपयुक्तता जीआई यानि ग्लाइसेमिक इंडेक्स से नापी जाती है. शोधकर्ताओं ने पाया कि बाजरा का 52.7 का निम्न जीआई है. यह पॉलिश किए हुए चावल और रिफाइंड गेहूं के जीआई से लगभग 30 प्रतिशत कम है. इसका कम होना ही मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी है. यह देश की एक अन्य लोकप्रिय फसल मक्का से भी कम है.
डॉक्टरों का कहना है कि बाजरा एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होता है. इन्हें बनाना बेहद आसान है और इन्हें बहुत ही कम समय में स्वादिष्ट व्यंजन बनाया जा सकता है. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर लेवल को भी नियंत्रित करते हैं. जो लोग ग्लूटिन को नहीं सहन कर पाते हैं. उनके लिए मोटा अनाज का सेवन अच्छा विकल्प है. बाजरा का सेवन ट्राइग्लिसराइड्स और सी-रिएक्टिव प्रोटीन को कम करता है. यह हार्ट रोगों को कम करने का काम भी करता है. मोटा अनाज में सोरघम (ज्वार), बाजरा (बाजरा), फिंगर बाजरा (चीना), कोदो बाजरा (कोदो), बार्नयार्ड बाजरा (सावा, सानवा, झंगोरा), छोटी बाजरा (कुटकी), ब्राउन टॉप बाजरा, कूटू बाजरा (कुट्टू) शामिल हैं.
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