महिलाओ को प्रेगनेंसी में खास ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि जच्चा और बच्चा दोनों की सुरक्षा बहुत जरुरी होती है. जरा सी भूल से मां और बच्चे दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. यही वजह है कि इस वक्त खानपान का खास ख्याल रखा जाता है. अक्सर आपने सुना होगा कि प्रेगनेंसी में पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए.घर में बड़े बुजुर्ग तो कहते ही हैं, डॉक्टर्स का भी यही कहना होता है. यहां तक कि कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि गर्भवती महिला अगर पपीता खा ले तो उसका मिसकैरेज हो सकता है. इस बात में कितनी सच्चाई है?
डॉक्टर के मुताबिक कच्चे या अधपके पपीते में लेटेक्स और पेपेन होता है, जो पेट में पल रहे भ्रूण के लिए नुकसानदायक होता है. बता दें कि पपीते में मौजूद लेटेक्स की मात्रा से गर्भाशय सिकुड़ जाता है जो भ्रूण के लिए खतरनाक हो सकता है.हालांकि पका हुआ पपीता खाना प्रेगनेंसी में फायदेमंद है, लेकिन लोग पके और अधपके पपीते में कंफ्यूज हो जाते हैं ऐसे में बच्चे को कोई नुकसान ना हो इसलिए डॉक्टर पपीता खाने से ही मना कर देते हैं.
वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में पपीता खाया जा सकता है, लेकिन अगर वो पूरी तरह से पका हुआ हो और इसका प्रयोग कम मात्रा में किया जाना चाहिए. पूरी तरह से पका हुआ पपीता विटामिन सी और विटामिन इ का स्रोत होता है और इसमें फाइबर के साथ ही फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो फायदेमंद है.
एक स्टडी के मुताबिक दावा किया गया है कि गर्भावस्था में कच्चा पपीता खाने से गर्भपात या प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ता है, जबकि पका हुआ पपीता खाने से नुकसान की संभावना कम होती है. साल 2002 में प्रकाशित एक स्टडी के परिणामों में कहा गया है कि पका पपीता खाने वाली गर्भवती चुहिया में गर्भपात की संभावना बहुत कम देखी गई, पर कच्चा पपीता खाने से मिसकैरेज और समय से पहले प्रसव की आशंका काफी अधिक देखी गई है.
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