भारत विरोधी रुख अपनाने वाली जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी है और शेख हसीना सरकार ने इस पार्टी पर बैन लगा दिया था. अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पार्टी पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है और कहा है कि इसके आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं. जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश को शरिया कानून से चलने वाला इस्लामी देश बनाने की वकालत करती रही है. पार्टी ने बांग्लादेश की मुक्ति में भारत की भूमिका का भारी विरोध किया था. और अब चीन के साथ इसके बढ़ते संबंध भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है.
हालांकि, पार्टी ने हाल के सालों में भारत विरोधी रुख नहीं दिखाया है, लेकिन पार्टी कभी-कभी बांग्लादेश में भारत के प्रभाव की आलोचना करती रही है. इसके अलावा, जमात-ए-इस्लामी पर चरमपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा देने और आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने के आरोप लगते रहे हैं. शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पार्टी को मिली मजबूती से क्षेत्र में कट्टरपंथ और अस्थिरता को बल मिल सकता है. चीन के समर्थन से अगर पार्टी सत्ता में आती है तो बांग्लादेश में एक ऐसी सरकार बनेगी जो शायद भारत के साथ आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दे पर सहयोग की इच्छा न रखे..
Business Sandesh Indian Newspaper | Articles | Opinion Pieces | Research Studies | Findings & News | Sandesh News