अर्थराइटिस जोड़ों से रिलेटेड समस्या है, जिसमें सूजन, दर्द और चलने में परेशानी होती है. ऑस्टियो अर्थराइटिस एक नॉर्मल समस्या है जो समय के साथ बढ़ती जाती है. इस रोग से 40 प्रतिशत पुरुष और 47 प्रतिशत महिलाएं प्रभावित हो सकती हैं. अर्थराइटिस को कंट्रोल करने में डाइट (Diet) का अहम महत्व है. प्रॉपर और हेल्दी डाइट से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है.
अर्थराइटिस के मरीज शुगर का सेवन कम करेंगे तो अर्थराइटिस का जोखिम कम होगा. अर्थराइटिस होने पर आइसक्रीन, चॉकलेट, कैंडी और मिठाई नहीं खाना चाहिए.
अर्थराइटिस में प्रोसेस्ड और रेड मीट का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए, जिससे जोड़ों में सूजन और दर्द बढ़ जाता है. इस रोगा में प्लांट बेस्ड फूड का सेवन फायदेमंद होता है.
अर्थराइटिस में ग्लूटन फूड से दूरी बनानी चाहिए. जैसे गेहूं, ज्वार, मोटा अनाज और मैदा सूजन को कम मात्रा में लेना चाहिए. हालांकि ग्लूटन का सेवन पूरी तरह बंद करना भी खतरनाक होता है. इसलिए इसे बैलेंस करने की जरुरत होती है.
अर्थराइटिस में अल्कोहल का सेव नहीं करना चाहिए. अधिक मात्रा में अल्कोहल लेने से जोड़ों और मांसपेशियों में सूजन आ सकती है. अगर आप भी अल्कोहल का ज्यादा सेवन करते हैं तो आज से ही दूरी बना लें.
इस समस्या में हाई ओमेगा-6 और लो ओमेगा-3 फैट्स नहीं लेना चाहिए. जिससे मांसपेशियों में होने वाली सूजन बढ़ सकती है और कई तरह की समस्याओं को जन्म दे सकती है. इसलिए ऐसे चीजों को खाने से बचना चाहिए.
अर्थराइटिस में नमक का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए. यह सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होता है. नमक के अधिक सेवन से हाई बीपी, डायबिटीज और अर्थराइटिस की प्रॉब्लम बढ़ सकती है.
खाने में अधिक फैटी चीजों का सेवन करने से भी शरीर में फैट जमा होता है जो मोटापे का कारण बन सकता है. और शरीर का अधिक वजन बढ़ना अर्थराइटिस को और बढ़ा सकता है.
खट्टी चीजों का सेवन करने से जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकती है. अर्थराइटिस के मरीजों को नींबू, संतरा, दही और छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए. इससे सेहत को गंभीर नुकसान हो सकते हैं.
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