किसी व्यक्ति को टीबी हो जाती है तो उसका इलाज 6 महीने तक चलता है. जो लोग 6 महीने तक लगातार दवाएं खाते हैं. वह पूरी तरह ठीक हो जाते है. जो बीच में दवा छोड़ देते हैं. उनमें दवाओं के प्रति रेसिसटेेंट पैदा हो जाता है. कभी महामारी रही टीबी का अब 100 प्रतिशत इलाज है. बावजूद इसके यह बीमारी आज भी दुनिया के लिए चिंता का सबब बनी हुई है. डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी उन लोगों के लिए अधिक खतरनाक होती है, जोकि पहले से किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहे होते हैं.
जो लोग डायबिटीज से पीड़ित होते हैं. उनमें टीबी होने का खतरा हेल्दी लोगों के सापेक्ष 4 गुना बढ़ जाता है. वहीं, जो लोग टीबी से संक्रमित होते हैं. जिसमें 30 प्रतिशत तक डायबिटीज होने की संभावना रहती है. ऐसे में डायबिटीज और टीबी में परस्पर कनेक्शन बना हुआ है.
टीबी का बेशक शत प्रतिशत इलाज है. लेकिन अभी भी यह विश्व के लिए खतरा बनी हुई है. सालाना लगभग एक से दो मिलियन लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को टीबी मुक्त देश बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है.
अन्य बीमारियों की तरह टीबी के लक्षण होते हैं. उन्हें समय पर पहचानना जरूरी होता है. जो लोग टीबी की चपेट में आते हैं. उन्हें थकान और कमजोरी, वजन कम होना, तेज बुखार आना, सीने में दर्द होना, लगातार खांसी आना, खांसी के साथ ब्लड आना शामिल होता है.
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