जयपुर, 12 जनवरी (वार्ता): राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि विधानसभा सत्र का सत्रावसान नहीं कर सीधे सत्र बुलाने की जो परिपाटी बन रही है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए घातक है।
श्री मिश्र आज राजस्थान विधानसभा में पीठासीन अधिकारियों के अखिल भारतीय सम्मेलन के समापन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अनुशंसा पर विधानसभा का सत्र आहूत करने की शक्ति राज्यपाल में निहित होती है। उन्होंने कहा कि सत्रावसान नहीं कर सीधे सत्र बुलाने की जो परिपाटी बन रही है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए घातक है। इससे विधायकों को निर्धारित संख्या में प्रश्न के अतिरिक्त अवसर प्राप्त नहीं होते हैं और संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होती है।
राज्यपाल ने कहा कि विधानसभाओं का विधिवत सत्रावसान हो और नया सत्र आहूत हो, इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल कोई व्यक्ति नहीं है, वह संवैधानिक संस्था है और उसे जब संवैधानिक आधार पर यह संतुष्टि हो जाती है कि अध्यादेश औचित्यपूर्ण है तभी वह उसे स्वीकृति प्रदान करता है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 23 जनवरी से शुरु होने वाला है और इससे पहले आहूत सत्र की बैठक गत सितंबर में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया। इससे पहले भी आहूत सत्र के अनिश्चतिकाल के लिए स्थगित होने के बाद सत्रावसान नहीं हुआ।
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