प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने केंद्रीय क्षेत्र/राज्य क्षेत्र/स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (आईपीपी) के ताप विद्युत संयंत्रों को नए कोयला लिंकेज देने को मंजूरी दे दी है।
संशोधित शक्ति नीति के तहत दो विंडो प्रस्तावित की गई हैं: 1. केंद्रीय बिजली कंपनियों/राज्यों को अधिसूचित मूल्य पर कोयला लिंकेज: विंडो-I; 2. सभी बिजली कंपनियों को अधिसूचित मूल्य से अधिक प्रीमियम पर कोयला लिंकेज: विंडो-II
विंडो-I (अधिसूचित मूल्य पर कोयला):
संयुक्त उपक्रम (जेवी) और उनकी सहायक कंपनियों सहित केंद्रीय क्षेत्र की ताप विद्युत परियोजनाओं (टीपीपी) को कोयला लिंकेज देने की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
विद्युत मंत्रालय की सिफारिश पर मौजूदा व्यवस्था के अनुसार राज्यों और राज्यों के समूह द्वारा अधिकृत एजेंसी को कोयला लिंकेज दिए जाएंगे। राज्यों को निर्धारित कोयला लिंकेज का उपयोग राज्य अपने स्वयं के जेनको, टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से पहचाने जाने वाले स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों (आईपीपी) या विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 62 के तहत विद्युत क्रय समझौता (पीपीए) वाले मौजूदा आईपीपी द्वारा धारा 62 के तहत पीपीए वाली नई विस्तार इकाई की स्थापना के लिए कर सकते हैं।
विंडो-II (अधिसूचित मूल्य से अधिक प्रीमियम):
कोई भी घरेलू कोयला आधारित विद्युत उत्पादक जिसके पास पीपीए है या अनटाइड और आयातित कोयला आधारित विद्युत संयंत्र (यदि उन्हें ऐसा चाहिए) अधिसूचित मूल्य से अधिक प्रीमियम का भुगतान करके 12 महीने तक की अवधि के लिए या 12 महीने से अधिक की अवधि से लेकर 25 वर्ष तक की अवधि के लिए नीलामी के आधार पर कोयला प्राप्त कर सकता है और विद्युत संयंत्रों को अपनी पसंद के अनुसार विद्युत बेचने की सुविधा प्रदान कर सकता है।
कार्यान्वयन रणनीति:
उपर्युक्त निर्णयों के कार्यान्वयन के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल)/सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) को निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, संबंधित मंत्रालयों और सभी राज्यों को भी संशोधित शक्ति नीति से अवगत कराया जाएगा ताकि संबंधित विभागों/प्राधिकरणों और नियामक आयोगों को भी इसकी जानकारी दी जा सके।
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