पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित त्रिपुरा के प्रसिद्ध संगीतज्ञ थांगा डारलोंग का वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियों के चलते निधन हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
स्वदेसी वाद्ययंत्र रोजम (बांस से बना बांसुरी जैसा एक वाद्ययंत्र) बजाने में महारत रखने वाले 103 वर्षीय डारलोंग को मुख्यमंत्री मानिक साहा के निर्देश पर 15 नवंबर को कैलाशहर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने रविवार को आखिरी सांस ली।
साहा ने रविवार को फेसबुक पर इस प्रख्यात लोक कलाकार के निधन पर शोक प्रकट किया। उन्होंने लिखा, ”पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध रोजम वादक और लोकसंगीत मर्मज्ञ थांगा डारलोंग के निधन पर मैं बहुत दुखी हूं। मैं शोक संतप्त परिवार के सभी सदस्यों एवं डारलोंग के शुभेच्छुओं के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं। ईश्वर उन्हें यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे तथा दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।”
त्रिपुरा के उनाकोटि जिले के मुराई गांव में 20 जुलाई 1920 को जन्मे थांगा डारलोंग को वाद्ययंत्र की शिक्षा उनके पिता से मिली थी। डारलोंग ने कई पारंपरिक उत्सवों में हिस्सा लिया था।
डारलोंग को स्थानीय संगीत को लोकप्रिय बनाने में उनके योगदान के लिए 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
– एजेंसी
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