अनियमित जीवनचर्या के चलते थायरॉइड एक आम बीमारी का रूप ले चुका है. गले में मौजूद थायरॉइड ग्रंथि के असंतुलित होते ही शरीर में मोटापा, वजन कम होना, थकान, डिप्रेशन, बाल गिरना, प्रजनन क्षमता में कमी आदि समस्याएं खुद ब खुद उठने लगती है जिससे शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान होता है। इसके साथ साथ थाइरॉइड का असर आंखों पर भी पड़ता है जिसे TED कहते हैं. हाइपरथाइराडिज्म की स्थिति में मरीज की आंखों में दुर्लभ ऑटो इम्यूम बीमारी हो जाती है जिससे आंखों को नुकसान होता है. चलिए जानते हैं कि TED क्या है और इसके लक्षण किस तरह दिखते हैं.
डॉक्टर कहते हैं कि हाइपरथाइराडिज्म से ग्रसित व्यक्ति को TED होने की संभावना ज्यादा होती है. इस स्थिति में आंखों की मसल्स और आंख की पिछली साइड में स्थित फैटी टिश्यूज में सूजन आ जाती है. हालांकि हाइपरथाइराडिज्म मरीजों के अलावा भी कई लोगों में यह बीमारी होती है लेकिन ऐसे मरीजों की संख्या बहुत ही कम होती है. हाइपरथाइराडिज्म के मरीज इस बीमारी की चपेट में ज्यादा आते हैं.
TED की बात करें तो इसे ऑटो इम्यूम सिड्रोम कहा गया है जिससे आंखों की रोशनी को सीधा तो नुकसान नहीं होता है लेकिन आंखों में काफी परेशानियां दिखने लगती हैं. इसके लक्षणों में सबसे पहले व्यक्ति को धुंधा दिखने लगता है यानी वो साफ साफ देख नहीं पाता. कभी कभी उसे एक चीज के दो रिफ्लेक्शन दिखने लगते हैं, यानी चीजें डबल दिखने लगती हैं. ऐसे मरीजों की आंखें कभी बहुत सूख जाती हैं तो कभी उनसे एकाएक पानी बहने लगता है. आंखें ज्यादा लाल हो जाना या फिर आंखों में दर्द होना भी TED के ही लक्षणों में गिना जा सकता है.
ऐसी स्थिति होने पर आई स्पेशलिस्ट और डॉक्टर से चैकअप कराए जाने की सलाह दी जाती है. TED का इलाज संभव है, लाइफस्टाइल में बदलाव, थायरॉइड पर कंट्रोल करके और अन्य दवा के माध्यम से आखों को राहत मिलने की बात कही गई है.
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