हम सभी यह जानते है कि लड़कियों के शरीर की बनावट लड़कों से काफ़ी अलग होती है तो ऐसे में ये बात बिलकुल स्वाभाविक सी है कि लड़कियों का विकास और उनका स्वाभाव भी बिलकुल अलग होगा।बात करें यदि शारीरिक विकास की तो विज्ञान के अनुसार लड़कियाँ माँ के पेट से ही परिपक्व होती हैं। दरअसल जब कोई महिला गर्भवती होती है और उसके गर्भ में लड़की होती है तो ऐसे में उस गर्भ में पल रही लड़की के शरीर में कुछ अंडे होते हैं। इन्हें प्राइमरी ऊसाइट कहा जाता है। जब लड़की जन्म लेती है तब भी यह प्राइमरी अंडे उसके शरीर में होते हैं।लड़कियों में प्यूबर्टी या परिपवक्ता की उम्र लगभग 10 साल के बाद मानी जाती है। ये प्राइमरी अंडे तब ही मैच्योर या परिपक्व होते हैं जब एक लड़की को उसका पहला पीरियड या मासिक धर्म आता है।आइये जानते है इसके बारे में विस्तार से।
पीरियड्स से सम्बंधित समस्याएँ :-
किसी भी लड़की को 10-14 साल की उम्र से ही पीरियड्स होना शुरू हो जाता हैं। कुछ लड़कियों को दस साल से पहले भी हो सकता हैं।
मासिक धर्म का आना खानपान पर निर्भर करता है:-
कुछ लड़कियों को पीरियड्स 15-16 साल की उम्र में भी हो सकते हैं। यह भी देखा जा सकता है लेकिन यदि एक लड़की के पीरियड्स इस उम्र के बीत जाने के बाद भी नहीं हो रहे हैं तो ऐसे में उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना ज़रूरी होता है। लड़की के शरीर के चेकअप के बाद पीरियड्स के देर से आने का कारण सामने आ जाएगा।
पेट में दर्द की समस्या :-
पीरियड्स के दौरान लड़कियों को पेट में दर्द की समस्या भी होती है। पीरियड्स के दौरान कभी कभी हल्का दर्द होना सामान्य बात है लेकिन यदि किसी लड़की को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक तेज दर्द की शिकायत है तो ऐसे में इस समस्या को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
मूड स्विंग :-
कई महिलाओं को पीरियड्स के पहले या पीरियड्स के बाद मूड स्विंग का सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भी मूड स्विंग होते हैं। महिलाएँ अत्यधिक चिड़चिड़ापन व तनाव का भी सामना करती हैं।
पेट ख़राब या दस्त संबंधी समस्याएँ :-
पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पाचन संबंधी समस्याएं भी हो जाती हैं जैसे उल्टी, दस्त और क़ब्ज़।
कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेट ख़राब या दस्त होने की शिकायत होती है तो वहीं कुछ महिलाओं को क़ब्ज की समस्या हो जाती है
गर्भावस्था से संबंधित समस्या :-
गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याएं, उनके कारण और निदान के विषय में
खून की कमी की समस्या :-
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में खून की कमी की समस्या हो जाती है। इसे एनीमिया के नाम से जाना जाता है। एनीमिया का वास्तविक कारण शरीर में आयरन की कमी होना है।गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को पोषणयुक्त आहार प्रदान करें।
हाथ पैरों में दर्द की समस्या :-
गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक शारीरिक परिश्रम करने से हाथ पैरों में दर्द और सूजन की समस्या हो जाती है। इस समस्या से बचाव के लिए गर्भवती महिला को सिर्फ़ उतना ही शारीरिक परिश्रम करना चाहिए जितना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
डायबिटीज़ :-
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने खानपान का विशेष ख़याल रखना चाहिए। ऐसा आहार ग्रहण करें जिसमें पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा मौजूद हो। जिन महिलाओं को डायबिटीज़ की समस्या है उन्हें गर्भावस्था के दौरान अपना विशेष ख़याल
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