आज के दौर में आईटी सेक्टर, कॉल सेंटर, हॉस्पिटल और फैक्ट्री जैसे कई क्षेत्रों में लोगों को नाइट शिफ्ट या रोटेशनल शिफ्ट में काम करना पड़ता है। हालांकि यह कामकाज की जरूरत हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक रात में जागना और दिन में सोना शरीर की प्राकृतिक घड़ी (बॉडी क्लॉक) को बिगाड़ देता है। यही वजह है कि नाइट शिफ्ट करने वालों में एबनॉर्मल स्लीप पैटर्न की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
एबनॉर्मल स्लीप पैटर्न क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति नियमित समय पर नहीं सो पाता या उसकी नींद का चक्र बार-बार बदलता रहता है, तो उसे एबनॉर्मल स्लीप पैटर्न कहा जाता है। नाइट शिफ्ट करने वालों में दिन में नींद पूरी न होना और रात में लगातार जागना आम समस्या है।
नाइट शिफ्ट से होने वाले नुकसान
1. हार्मोनल असंतुलन
रात में जागने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव कम हो जाता है, जिससे थायरॉयड, इंसुलिन और स्ट्रेस हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसका असर वजन, मूड और एनर्जी लेवल पर पड़ता है।
2. इम्यून सिस्टम कमजोर होना
पूरी नींद न मिलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। ऐसे लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
3. मोटापा और डायबिटीज का खतरा
नाइट शिफ्ट करने वालों में अनियमित खाने की आदतें बन जाती हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इससे वजन बढ़ने और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
4. दिल की बीमारियों का खतरा
नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी प्रभावित होता है, जो हार्ट डिजीज की बड़ी वजह बन सकता है।
5. मानसिक स्वास्थ्य पर असर
लगातार नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन, तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। ध्यान लगाने में भी परेशानी होती है।
एबनॉर्मल स्लीप पैटर्न के लक्षण
- हर समय थकान महसूस होना
- दिन में नींद आना, रात में नींद न आना
- सिर दर्द और चक्कर
- चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग
- याददाश्त कमजोर होना
नाइट शिफ्ट में नींद को कैसे रखें सही?
- शिफ्ट से लौटकर तुरंत सोने की आदत डालें
- सोते समय कमरे में अंधेरा और शांति रखें
- मोबाइल और टीवी से दूरी बनाएं
- कैफीन (चाय-कॉफी) का सेवन सीमित करें
- हल्का और संतुलित भोजन करें
- छुट्टी के दिन भी नींद का समय ज्यादा न बदलें
जरूरी सलाह
अगर लंबे समय से नींद की समस्या बनी हुई है और साथ में थकान, चक्कर या वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर स्लीप टेस्ट या हार्मोन जांच कराई जा सकती है।
नाइट शिफ्ट करना मजबूरी हो सकती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। एबनॉर्मल स्लीप पैटर्न शरीर को धीरे-धीरे बीमार बना देता है। सही दिनचर्या, संतुलित आहार और पर्याप्त आराम से इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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