महिला नेतृत्व, वाहन निर्यात और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी से मजबूत हो रहा भारत का भविष्य

भारत तेजी से एक विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है, जिसमें महिला नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और वैश्विक निर्यात बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि देश में लगभग 76,000 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें से अधिकतर टियर-2 और टियर-3 शहरों से हैं। वे ‘विकसित बिहार: महिला भागीदारी के माध्यम से’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में बोल रहे थे, जिसका आयोजन बिहार सरकार और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बीते 11 वर्षों में शासन का ढांचा गरीब, किसान, युवा और महिलाओं पर केंद्रित किया है, जिसमें महिलाओं को सबसे ऊपर प्राथमिकता दी गई है। इस अवसर पर उन्होंने ‘जीविका ई-लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम ऐप’ लॉन्च किया और “सशक्त महिला, समृद्ध बिहार” नामक प्रकाशन का अनावरण किया, जो राज्य में महिला सशक्तिकरण की गाथा को दर्शाता है।

वाहन निर्यात में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
देश के वाहन निर्यात में भी इस साल तेज उछाल देखने को मिला है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री संगठन SIAM के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारत ने 14.5 लाख से अधिक वाहनों का निर्यात किया, जो पिछले साल की समान अवधि (12 लाख इकाई) की तुलना में 22% अधिक है। यात्री वाहनों के निर्यात में भी 13% की वृद्धि हुई है, जो अब तक की सबसे ऊंची तिमाही संख्या (2,04,330 इकाई) है।

परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र की एंट्री जल्द
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत अब निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए तैयार हो रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार परमाणु ऊर्जा अधिनियम और नागरिक दायित्व अधिनियम जैसे कानूनों में संशोधन की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को दूर किया जा सके।

फिलहाल, भारत में केवल सरकारी इकाइयां जैसे NPCIL, BHAVINI और ASHVINI ही परमाणु संयंत्र स्थापित कर सकती हैं, लेकिन जल्द ही निजी कंपनियों को भी अवसर मिल सकता है।

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