नीम पर चढ़ी गिलोय क्यों है अमृत के समान? जानिए राज़

कोरोना महामारी के दौरान जिस एक जड़ी-बूटी की सबसे ज़्यादा चर्चा हुई, वो थी गिलोय (Tinospora Cordifolia)। पहले जंगलों और झाड़ियों में पाई जाने वाली यह बेल अब लोगों ने घरों और बालकनियों में भी उगाना शुरू कर दिया है। इसकी पत्तियां पान जैसी होती हैं और यह गर्मी से लेकर बारिश तक हरी-भरी बनी रहती है।

🌱 क्या है गिलोय की खासियत?
गिलोय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जिस पेड़ पर चढ़ती है, उसके गुण खुद में समाहित कर लेती है। इसलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय को सबसे ज्यादा औषधीय माना जाता है।

इसमें गिलोइन, टीनोस्पोरिन, टीनोस्पोरिक एसिड, और साथ ही आयरन, जिंक, कैल्शियम, कॉपर, फॉस्फोरस और मैग्नीज जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

🩺 गिलोय के चमत्कारी औषधीय गुण
गिलोय के पत्ते, तना और जड़ तीनों का आयुर्वेद में उपयोग होता है।

इसके तने और डंठल में सबसे ज़्यादा औषधीय गुण होते हैं।

इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं।

🧬 किन बीमारियों में फायदेमंद है गिलोय?
बुखार (टायफॉइड या वायरल)

डायबिटीज

गठिया और जोड़ों का दर्द

पीलिया और लिवर की समस्या

कब्ज, अपच और एसिडिटी

पेशाब संबंधी दिक्कतें

गिलोय शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और तीनों दोष – वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है।

🍵 कैसे करें गिलोय का सेवन?
गिलोय का सेवन आप तीन रूपों में कर सकते हैं:

गिलोय सत्व – सूखे गिलोय से तैयार किया जाता है

गिलोय का जूस – मार्केट में भी मिलता है या घर पर बना सकते हैं

गिलोय चूर्ण – आयुर्वेदिक दुकानों पर उपलब्ध है

गिलोय काढ़ा – गिलोय की पत्तियों, जड़ और तने को पानी में उबालकर बनाएं

👉 ध्यान दें: किसी भी बीमारी के लिए नियमित सेवन से पहले आयुर्वेदाचार्य से परामर्श ज़रूर लें।

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