ब्रेन ट्यूमर—सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है, और यह स्वाभाविक भी है। लेकिन यह जानना जरूरी है कि हर सिर दर्द ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, और न ही यह बीमारी अचानक से सभी को हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ विशेष स्थितियां, आदतें और जेनेटिक फैक्टर ऐसे होते हैं, जो व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर के खतरे के करीब ले जाते हैं।
डॉ. के अनुसार, “ब्रेन ट्यूमर की संभावना उन लोगों में अधिक देखी गई है, जो कुछ खास जोखिम कारकों के संपर्क में रहते हैं या जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि में यह बीमारी पाई जाती है।”
ब्रेन ट्यूमर क्या है?
ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क की कोशिकाओं में होने वाली असामान्य वृद्धि है। यह बेनाइन (सौम्य) भी हो सकता है और मेलिग्नेंट (घातक) भी। यह ट्यूमर मस्तिष्क की संरचना को प्रभावित करता है और न्यूरोलॉजिकल कार्यों में बाधा डाल सकता है। समय रहते इलाज न हो तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
किन लोगों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा अधिक?
1. परिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास (Genetics):
यदि परिवार में किसी को ब्रेन ट्यूमर रहा है, तो अन्य सदस्यों में भी इसका जोखिम बढ़ जाता है। खासकर ऐसे जेनेटिक सिंड्रोम जैसे न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस, लिओ-फ्राउमेनी सिंड्रोम, आदि से जुड़ी अनुवांशिक स्थितियों में यह खतरा अधिक होता है।
2. उम्र और लिंग:
ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ प्रकार खासतौर पर बच्चों और वृद्धों में पाए जाते हैं। पुरुषों में ग्लियोब्लास्टोमा जैसी आक्रामक किस्म ज्यादा पाई जाती है, जबकि कुछ सौम्य ट्यूमर महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलते हैं।
3. रेडिएशन का एक्सपोज़र:
जिन लोगों को चिकित्सा कारणों से सिर पर रेडिएशन थेरेपी दी गई है (जैसे कैंसर के इलाज में), उनमें ब्रेन ट्यूमर विकसित होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा परमाणु विकिरण वाले क्षेत्रों के पास रहने वाले लोग भी जोखिम में होते हैं।
4. इम्यून सिस्टम कमजोर होना:
एचआईवी संक्रमित लोग, अंग प्रत्यारोपण के बाद दवाएं लेने वाले मरीज या लंबे समय से इम्यूनो-सप्रेसेंट दवाएं ले रहे लोग ब्रेन ट्यूमर के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
5. खानपान और जीवनशैली:
हालांकि डायरेक्ट संबंध साबित नहीं हुआ है, लेकिन प्रोसेस्ड मीट, अत्यधिक मोबाइल/स्क्रीन रेडिएशन, और मिलावटी भोजन को कुछ शोधों ने ब्रेन ट्यूमर से जोड़ने की कोशिश की है।
6. खतरनाक रसायनों के संपर्क में रहना:
इंडस्ट्रियल केमिकल्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, या लंबे समय तक टॉक्सिन के संपर्क में रहने से भी ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है।
ब्रेन ट्यूमर के संभावित लक्षण:
लगातार सिरदर्द, जो समय के साथ बढ़ता जाए
मतली या उल्टी, खासकर सुबह के समय
देखने या सुनने में गड़बड़ी
संतुलन या चाल में बदलाव
याददाश्त में कमी
दौरे (सीज़र)
व्यवहार में बदलाव
यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
क्या है इलाज और रोकथाम?
ब्रेन ट्यूमर का इलाज इसकी प्रकार, आकार और स्थिति पर निर्भर करता है। इसके लिए सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, और कीमोथेरेपी का सहारा लिया जाता है। सौम्य ट्यूमर में सिर्फ निगरानी भी पर्याप्त हो सकती है।
रोकथाम के लिए कोई पुख्ता तरीका नहीं है, लेकिन जोखिम कारकों से बचना और नियमित जांच कराना ही सबसे बेहतर उपाय है।
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