भारत समेत दुनियाभर में पुरुषों में तेजी से बढ़ता हुआ एक कैंसर है, प्रोस्टेट कैंसर। यह कैंसर पुरुषों के प्रजनन तंत्र में मौजूद प्रोस्टेट ग्रंथि में होता है, जिसका मुख्य कार्य वीर्य के तरल पदार्थ का निर्माण करना है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कैंसर आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है, और शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि 40 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है, लेकिन कुछ विशेष कारक ऐसे हैं जो इसे और अधिक गंभीर बना सकते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर के हाई-रिस्क फैक्टर्स: किन पुरुषों को सतर्क रहना चाहिए?
1. उम्र का बढ़ना
जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है।
यूरोलॉजिस्ट के अनुसार,
“60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में यह कैंसर आम है। लेकिन अगर परिवार में इसका इतिहास रहा हो, तो 45 वर्ष की उम्र के बाद से ही नियमित जांच आवश्यक हो जाती है।”
2. पारिवारिक इतिहास (Genetic History)
अगर आपके पिता, चाचा या भाई को कभी प्रोस्टेट कैंसर हुआ है, तो आपको इसका जोखिम सामान्य से दोगुना हो सकता है। खासतौर पर यदि यह कैंसर 60 की उम्र से पहले किसी परिजन को हुआ हो।
3. अनुचित जीवनशैली
फास्ट फूड, शराब, धूम्रपान, और शारीरिक गतिविधि की कमी प्रोस्टेट कैंसर को बढ़ावा देने वाले फैक्टर्स हैं। मोटापा भी एक बड़ा जोखिम कारक माना जाता है।
4. हार्मोनल असंतुलन
अत्यधिक टेस्टोस्टेरोन लेवल प्रोस्टेट ग्रंथि को असामान्य रूप से बढ़ा सकता है, जिससे कैंसर की आशंका बनती है।
5. आवृत्त यूरिनरी समस्याएं
बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने में रुकावट, या रात में बार-बार उठना — ये लक्षण यदि लगातार बने रहें, तो प्रोस्टेट जांच की आवश्यकता होती है।
प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
हालांकि यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण समय पर पहचानने पर जान बचा सकते हैं:
पेशाब के दौरान जलन या दर्द
ब्लैडर पूरी तरह से खाली न होना
वीर्य में खून आना
पीठ, कूल्हे या जांघों में लगातार दर्द
यौन क्षमता में गिरावट
विशेषज्ञ सलाह: यदि ये लक्षण 2 सप्ताह से अधिक बने रहें, तो PSA टेस्ट (Prostate-Specific Antigen) या प्रोस्टेट बायोप्सी के माध्यम से जांच करानी चाहिए।
बचाव और जागरूकता ही है सबसे बड़ा इलाज
नियमित जांच कराएं: विशेष रूप से 45 की उम्र के बाद PSA टेस्ट कराना फायदेमंद है।
संतुलित आहार लें: हरी सब्ज़ियां, टमाटर (लाइकोपीन), अखरोट, और ओमेगा-3 युक्त भोजन लाभकारी माने जाते हैं।
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें – यह हार्मोन बैलेंस और वजन नियंत्रण में मदद करता है।
विशेषज्ञों का मत
कैंसर रोग विशेषज्ञ बताते हैं:
“भारत में पुरुषों की बड़ी संख्या प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूक नहीं है। जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक वह तीसरे या चौथे चरण में पहुंच जाती है। समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली से इस कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है।”
यह भी पढ़ें:
पेशाब में जलन को न करें नजरअंदाज, कई गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत
Business Sandesh Indian Newspaper | Articles | Opinion Pieces | Research Studies | Findings & News | Sandesh News