बुखार आमतौर पर संक्रमण का संकेत होता है और एक-दो दिन में ठीक हो जाता है। लेकिन अगर हर कुछ दिनों में बुखार बार-बार आता है, तो यह सिर्फ मौसमी वायरल नहीं, बल्कि किसी अंदरूनी या क्रॉनिक बीमारी का लक्षण हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के “रिलैप्सिंग फीवर” को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. बताते हैं, “अगर किसी व्यक्ति को महीने में कई बार बुखार आता है, और हर बार कुछ दिन बाद फिर से दोबारा शुरू होता है, तो यह किसी छिपी बीमारी जैसे टीबी, मलेरिया, टायफॉइड, या ऑटोइम्यून रोग का लक्षण हो सकता है।”
हर कुछ दिनों में बुखार आने के प्रमुख कारण:
1. मलेरिया:
मलेरिया में बुखार एक तय समय पर आता है, खासकर हर 48 या 72 घंटे में। इसके साथ कंपकंपी, पसीना और थकान होती है।
2. टायफॉइड (Typhoid):
टायफॉइड में बुखार धीरे-धीरे बढ़ता है और एंटीबायोटिक लेने के बाद कुछ दिन कम हो सकता है, लेकिन अधूरी दवा से यह दोबारा लौट सकता है।
3. टीबी (Tuberculosis):
फेफड़ों या आंतरिक टीबी में शाम के समय हल्का बुखार रोजाना या रुक-रुककर आ सकता है। इसके साथ वजन घटना और पसीना आना भी लक्षण हैं।
4. ऑटोइम्यून बीमारियां:
रुमेटाइड आर्थराइटिस, ल्यूपस जैसी बीमारियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली खुद ही पर हमला करती है, जिससे बार-बार हल्का बुखार आ सकता है।
5. क्रॉनिक इंफेक्शन या डेंगू-चिकनगुनिया का आफ्टर-इफेक्ट:
कुछ वायरल बीमारियों के बाद भी हफ्तों तक बुखार आता रहता है।
क्या करें?
खुद से बार-बार पेरासिटामोल न लें
रक्त और मूत्र की जांच करवाएं
2 हफ्तों से ज्यादा समय तक बुखार आए तो डॉक्टर से मिलें
शरीर में थकान, पसीना, खांसी या वजन कम हो तो अलर्ट रहें
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