केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘डीपफेक’ के मुद्दे पर सोशल मीडिया मंच के प्रतिनिधियों के साथ बृहस्पतिवार को एक बैठक बुलाई है। एक सूत्र ने यह जानकारी दी।
यह कदम प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग पर चिंताओं और ‘डीपफेक’ पर नकेल कसने के लिए डिजिटल मंचों को प्रोत्साहित करने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।
‘डीपफेक’ में कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल करते हुए किसी तस्वीर या वीडियो में मौजूद व्यक्ति की जगह किसी दूसरे को दिखा दिया जाता है। इसमें इतनी समानता होती है कि असली और नकली में अंतर करना काफी मुश्किल होता है।
एक सूत्र के मुताबिक, वैष्णव 23 नवंबर को ‘डीपफेक’ के मुद्दे पर सोशल मीडिया मंच के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
हाल ही में, बॉलीवुड के कई कलाकारों को निशाना बनाने वाले कई ‘डीपफेक’ वीडियो सोशल मीडिया मंच पर प्रसारित हो गए थे। इसपर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की थी। इससे नकली सामग्री बनाने के लिए प्रौद्योगिकी तथा उपकरणों के दुरुपयोग को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को आगाह किया था कि कृत्रिम मेधा (एआई) से बनाए गए ‘डीपफेक’ बड़े संकट का कारण बन सकते हैं। समाज में असंतोष उत्पन्न कर सकते हैं। उन्होंने मीडिया से इसके दुरुपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लोगों को शिक्षित करने का आग्रह भी किया था।
वहीं वैष्णव ने आगाह किया कि अगर मंच ‘डीपफेक’ को हटाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाते हैं, तो उन्हें आईटी अधिनियम के तहत वर्तमान में जो ‘सुरक्षित हार्बर प्रतिरक्षा’ मिली है, वह नहीं दी जाएगी।
सरकार ने हाल ही में इस मुद्दे पर कंपनियों को एक नोटिस जारी किया था। मंत्री ने साथ ही स्पष्ट किया था कि कंपनियों को ऐसी सामग्रियों से निपटने के लिए अधिक आक्रामक कदम उठाने होंगे।
वैष्णव ने भी पिछले सप्ताहांत में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि इस मुद्दे पर सभी मंचों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाई जाएगी।
मेटा और गूगल जैसे बड़े मंचों को बैठक में बुलाया जाने के सवाल पर मंत्री ने सकारात्मक जवाब दिया था।
– एजेंसी
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