केंद्रीय बजट 2025-26 में देश के आर्थिक विकास के लिए महत्वाकांक्षी योजनाओं का संकलन प्रस्तुत किया गया है। कुल रिसीप्ट्स ₹34.96 लाख करोड़ और कुल खर्च ₹50.65 लाख करोड़ अनुमानित हैं, जिसमें राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4% रहने की उम्मीद है। कृषि को विकास का प्रथम इंजन मानते हुए, ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ तथा ‘ग्रामीण समृद्धि और लचीला निर्माण’ कार्यक्रमों से 100 विकासशील जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन और किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स के लिए निवेश, क्रेडिट सुविधाएं तथा नए कोष की स्थापना से नवाचार और रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है। अवसंरचना में ‘मेक इन इंडिया’ और राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के तहत बड़े पैमाने पर निवेश की योजनाएँ हैं, जबकि जल, बिजली और परिवहन क्षेत्रों में सुधार हेतु भी कदम उठाए गए हैं।
शैक्षिक, स्वास्थ्य और कौशल विकास में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अटल टिंकरिंग लैब्स, एआई उत्कृष्टता केंद्र, और मेडिकल कॉलेजों में सीटों का विस्तार भी किया जाएगा। कर संरचना में सुधार के तहत मध्यम वर्ग को राहत देने के साथ टीडीएस/टीसीएस में भी संशोधन प्रस्तावित है। यह बजट समग्र विकास और स्थिर आर्थिक प्रगति का रोडमैप प्रस्तुत करता है।
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