पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 200 प्रतिशत तक के टैरिफ प्लान ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। इस कदम का सीधा असर न केवल चीन या अन्य देशों पर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका के घरेलू बाजार पर भी इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। खासकर स्वास्थ्य क्षेत्र में इस टैरिफ के चलते दवाओं की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
टैरिफ का मकसद तो घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना और चीन से आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम करना है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 200% तक का भारी टैरिफ अमेरिका की दवा कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए भयंकर संकट बन सकता है। दवाइयों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री और उपकरण का बड़ा हिस्सा चीन से आता है। अगर इन पर भारी टैक्स लग जाएगा, तो दवाओं की लागत अपने आप बढ़ जाएगी, जिसका बोझ सीधे अमेरिकी जनता पर पड़ेगा।
दवाइयों की कीमतों में होगी भारी उछाल
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन से आयातित फार्मास्यूटिकल कच्चे माल पर 200% तक का टैरिफ लगाने से दवाइयों की कीमतें बढ़ना स्वाभाविक है। अमेरिका में पहले से ही दवाओं की कीमतें कई अन्य देशों के मुकाबले अधिक हैं। इस बढ़ोतरी से आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में बाधा आ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ और उद्योग के प्रतिनिधि भी इस टैरिफ प्लान को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि दवाओं की महंगाई से मरीजों का आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कई लोग जरूरी इलाज से वंचित रह सकते हैं। इससे अमेरिका के स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
घरेलू उद्योगों को होगा फायदा, लेकिन कीमत पर?
हालांकि टैरिफ का मकसद घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करना है ताकि अमेरिका में उत्पादन बढ़े और आयात कम हो, लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि घरेलू उत्पादन को इतना तेजी से बढ़ाना आसान नहीं है। उत्पादन क्षमता, कच्चे माल की उपलब्धता और लागत के चलते घरेलू उद्योग फिलहाल इस मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं।
इस स्थिति में चीन पर निर्भरता कम करना एक लंबी प्रक्रिया साबित होगी। वहीं, टैरिफ से हुई कीमतों की बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस वजह से अमेरिका की आर्थिक स्थिति भी अस्थिर हो सकती है।
वैश्विक बाजारों में हलचल
टैरिफ प्लान ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। व्यापारिक साझेदार इससे बचने के लिए नए मार्ग खोज रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक आर्थिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही, अमेरिका के अंदर भी आर्थिक अनिश्चितता बढ़ेगी, जिससे निवेशकों और उपभोक्ताओं में असंतोष फैल सकता है।
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