एक पादरी, वकील और तकनीशियन को विद्रोह के कारण मौत की सजा मिली। जब अपराधियों ने आखिरी ख्वाहिश कि प्रथा बताई तो उन्हें गर्दन ऊपर और नीचे रखने के विकल्प मिले। पादरी ने ऊपर देखना स्वीकारा ताकि भगवान को देख सके और जैसे ही बटन दबाया गया तो आरी गर्दन से सिर्फ 2 इंच ऊपर रूक गई। अधिकारियों ने इसे ईश्वर की मर्जी समझ कर उसे छोड़ दिया। वकीन ने भी ऊपर देखा और जब आरी रूकी तो वह बोला ‘कानूनन एक व्यक्ति को दो बार सजा नहीं दी जा सकती और वो भी छूट गया। तकनीशियन ने यही चूज किया। जब बटन दबाया जा रहा था तो वो चिल्लाया एक मिनट रूको! अगर आप उस हरे और लाल तार को आपस मे बदल देंगे तो काम हो जाएगा।… और काम तमाम हो गया।😜😂😂😂😛🤣
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शिक्षक : “तुम्हे आने में देर क्यों हुई?”
रोहन : “जी, रास्ते में बोर्ड लगा हुआ था, ‘आगे स्कुल हैं-कृपया धीरे चलें'”😜😂😂😂😛🤣
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शिक्षक : “राम तुम्हे आने में देरी क्यों हुई?”
रोहन : “जी, मेरे दो रूपैये रास्ते में गिर गये थे, मैं उन्हे ढ़ुंढ़ रहा था”
शिक्षक : “और श्याम तुम्हे देरी क्यों हुई? क्या तुम्हारे भी रूपैये खो गये थे?”
श्याम : ” जी नहीं, मैं तो राम के रूपैये को पावँ के नीचे दबा कर खड़ा था.”😜😂😂😂😛🤣
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