आयुर्वेदिक मेडिसिन के रूप में अश्वगंधा काफी जाना-पहचाना नाम है. अश्वगंधा कब और कितनी मात्रा में खाया जाए, इसको लेकर सही सलाह बहुत जरूरी है. यह सलाह किसी वैद्य या आयुर्वेदिक डॉक्टर से लेना जरूरी है. यूं तो तमाम मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर अश्वगंधा खाने के अनेक फायदे बताए जाते हैं.
अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक उपचार में काम आने वाली जड़ी-बूटी है. इस जड़ी-बूटी से अश्वगंधा चूर्ण, पाउडर और कैप्सूल बनाया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम विथानिया सोम्निफेरा (Withania somnifera) है. आम बोलचाल में इसे अश्वगंधा या इंडियन विंटर चेरी बोला जाता है. अश्वगंधा का पौधा 35-75 सेमी लंबा होता है और मुख्य रूप से भारत जैसे – मध्यप्रदेश, पंजाब, राजस्थान व गुजरात में इसकी खेती होती है. चीन और नेपाल में भी अश्वगंधा उगाया जाता है.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक अश्वगंधा में एंटी स्ट्रेस प्रॉपर्टीज होती हैं. इससे स्टेमिना बढ़ाने में मदद मिलती है. अश्वगंधा की जड़ और पत्तियां, दोनों के सेवन से शरीर को कई फायदे होते हैं.
अश्वगंधा के फायदे हैं लेकिन इसकी जड़ या पत्तों का सेवन किसी भी सामान्य रिपोर्ट को पढ़कर न करें. कोरोना काल के दौरान आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल को लेकर आयुष मंत्रालय ने समय-समय पर कई बार एडवाइजरी जारी की हैं. आयुष मंत्रालय गिलोय और अश्वगंधा दोनों को लेकर एडवाइजरी जारी कर चुका है.
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, कोई भी दवा या आयुर्वेदिक हर्ब्स तक तक पूर्ण रूप से फायदा नहीं करती, जब तक कि दवा से जुड़े उपचार सही से न लिया जाए. साथ ही खान-पान और सही दिनचर्या का पालन न किया जाए. क्योंकि मानव शरीर एक प्रकार की मशीन है, जिसे उचित पोषण और रखरखाव की आवश्यकता होती है. ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से हम बीमार पड़ते हैं, इसमें सही भोजन, पानी, हवा आदि न मिलना शामिल है.
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