बच्चे के जन्म के बाद पहले कुछ महीनों तक माँ का दूध आमतौर पर पर्याप्त मात्रा में आता है, लेकिन कुछ महिलाओं में बच्चे के तीन से चार महीने की उम्र तक दूध की आपूर्ति में गिरावट आ जाती है। यह बदले हुए शरीर और दूध उत्पादन के प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, या कभी-कभी कुछ रोकावट की वजह से भी होता है।
3‑4 महीने का चरण: ‘स्तनपान संकट’ ही क्यों?
UNICEF और अंतरराष्ट्रीय स्तनपान विशेषज्ञों ने इस समय को “3‑महीने का स्तनपान संकट (breastfeeding crisis)” कहा है। इसमें शामिल आम अनुभव और उसके कारण हैं:
स्तनों की “पूर्णता” का अनुभव घटना: शुरुआती दिनों में स्तन अक्सर भारी-भरा महसूस होता था, लेकिन धीरे-धीरे वह मुलायम हो जाते हैं। यह ऐसा बदलाव है जिसे कई माताएं दूध की कमी समझ लेती हैं।
पंप से दूध घटने का भ्रम: माँ पहले पंप से बहुत दूध निकाल पाती थीं, लेकिन अब वह कम मात्रा में निकलता है। शरीर अब समझता है कि जरूरत कितनी होनी चाहिए, इसलिए उत्पादन उसी अनुरूप घटता है।
ये संकेत जरूरी नहीं कि वास्तविक दूध की कमी है—यह ‘रेगुलेशन’ यानी माँ के शरीर में दूध उत्पादन का सटीक संतुलन बन जाना भी हो सकता है।
क्या कभी यह सचमुच की कमी होती है?
हाँ, यदि दूध का आना निरंतर घट रहा हो तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
1. माँ और बच्चे दोनों से जुड़ी तकनीकी वजहें
अप्रभावी आसन या लॅचिंग (latch): बच्चे का दूध ठीक से न पी पाना दूध का निकलना और उत्पादन दोनों प्रभावित कर सकता है।
अप्रत्याशित रूप से प्रारूपित खिलाना (scheduled feeding), फार्मूला का जल्दी इस्तेमाल—ये शरीर को संकेत करते हैं कि अधिक दूध बनाने की ज़रूरत नहीं है।
2. हार्मोन या स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे
हार्मोनल बदलाव: PCOS, थायरॉइड विकार, पूर्व की स्तन संबंधी सर्जरी, retained placenta जैसी समस्याएँ दूध की कमी का कारण हो सकती हैं।
तनाव और थकान: उच्च कोर्टिसोल हार्मोन, नींद की कमी और मानसिक तनाव दूध के उत्पादन को प्रभावित करते हैं।
3. माँ की जीवनशैली और पोषण
तुरंत काम पर लौटना या कम पंपिंग करना: इससे दूध नहीं निकला तो उत्पादन भी कम हो जाता है।
अपर्याप्त पोषण और पानी: दिहाड़ी माँ के शरीर को जल और पोषक घटकों की ज़रूरत होती है—इसकी कमी दूध की मात्रा घटा सकती है।
क्या यह केवल मानसिक भ्रम है?
बहुत माताएं ‘Perceived Insufficient Milk Supply’ (PIMS) यानी दूध की कमी के भ्रम से गुजरती हैं—जब दूध पर्याप्त होता है लेकिन माँ को लगता है नहीं। इससे फ़ॉर्मूला इस्तेमाल बढ़ सकता है, दूध की वास्तविक आपूर्ति में भी कमी आ सकती है।
बस बच्चे के डायपर्स (गीले/मल वाले) और वजन पर ध्यान दें—ये असली संकेत हैं।
क्या किया जा सकता है?
दूध निकालने और स्तन उत्तेजना बढ़ाएँ: त्वचा से त्वचा संपर्क, 8-12 बार दूध निकालना, पंपिंग या सही लॅचिंग जैसी विधियाँ अपनाएँ।
तनाव और थकान को कम करें: परिवार या पोस्टपार्टम सपोर्ट ग्रुप की मदद लें।
पोषण और पानी पर ध्यान दें: संतुलित भोजन, पर्याप्त जल लें।
अगर किसी बात पर शक हो—जैसे बच्चे बढ़ता नहीं, लॅच ठीक नहीं, स्तन में blockage—तो विशेषज्ञ या IBCLC (लैक्टेशन कंसल्टेंट) से तुरंत संपर्क करें।
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