कुछ महाशय एक मधुशाला में बैठे बियर की चुस्कियां ले रहे थे। एकाएक एक महाशय एक बंदर के साथ वहाँ प्रविष्ट हुए। बंदर ने लोगों को तो परेशान नही किया, लेकिन वहाँ रखी वस्तुओं से छेडछाड करनी शुरू कर दी। उसके मालिक ने मधुशाला के कर्मचारियों को आश्वस्त किया “घबराइये नही, वैसे तो वह कुछ तोडेगा फोडेगा नही, ज्यादा से ज्यादा कुछ खा जायेगा, उसका पैसा मै दे दूंगा”। बंदर तीन चार बियर पी गया, प्याले तोडकर खा गया, ऐसा करके वह छोटा छोटा कुछ कुछ सामान खा गया। उसका मालिक मुस्कराता रहा, उसे आश्वस्त देख बाकी लोग भी निर्विकार भाव से बंदर को देखते रहे। अचानक बंदर को एक बडी क्रिकेट की गेंद मिल गई। इसके पहले कि कोई कुछ समझ पाता बंदर उसे भी गडप कर गया। खैर, उसका मालिक उठा, उसने पैसे दिये और रुखसत हुआ। लोगों ने भी चैन की सॉस ली। कुछ दिनों बाद वही महाशय उसी बंदर के साथ मधुशाला में हाजिर हुए। बंदर पुनः वस्तुयें निगलने लगा, लेकिन इस बार वह हर वस्तु को पीछे ले जाकर पहले पीछे से अंदर डालता, फिर खाता। लोगों को कौतूहल हुआ। उनके सवाल का जवाब देते हुए बंदर के मालिक ने बताया “जब से उसे वह गेंद निकालनी पडी, वह हर वस्तु को खाने से पहले उसका पहले पीछे ले जाकर माप लेता है, फिर खाता है”।😜😂😂😂😛🤣
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