पथरी को कहिए अलविदा, छुई मुई से मिलेगा बिना ऑपरेशन इलाज

आमतौर पर खेतों, बाग-बगिचों या रास्तों के किनारे उगने वाला ‘छुई मुई’ का पौधा जितना नाजुक और शर्मीला दिखता है, उतना ही ताकतवर यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है। वैज्ञानिक भाषा में Mimosa Pudica कहे जाने वाला यह पौधा वर्षों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग होता आया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह छोटा-सा पौधा पथरी (किडनी स्टोन) जैसी जिद्दी बीमारी में भी चमत्कारी असर दिखाता है। साथ ही, यह कई अन्य शारीरिक समस्याओं में भी बेहद लाभकारी है।

क्या है छुई मुई और कैसे करता है काम?

छुई मुई को ‘लाजवंती’, ‘Touch Me Not’ या ‘Sensitive Plant’ भी कहा जाता है। इसकी पत्तियां छूने मात्र से सिकुड़ जाती हैं, लेकिन इसकी जड़ें और पत्तियां औषधीय शक्तियों से भरपूर होती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, छुई मुई में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, और डाययूरेटिक गुण पाए जाते हैं। ये गुण इसे पथरी, जख्म, त्वचा रोग और हॉर्मोनल समस्याओं के इलाज में उपयोगी बनाते हैं।

कैसे पथरी को करता है दूर?

छुई मुई की जड़ का काढ़ा या पत्तियों का रस पेशाब के माध्यम से पथरी को बाहर निकालने में मदद करता है। यह किडनी को डिटॉक्स करता है और नई पथरी बनने की संभावना को भी कम करता है। कई आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, नियमित सेवन से पथरी बिना ऑपरेशन के निकल सकती है।

छुई मुई से जुड़ी अन्य 3 प्रमुख बीमारियां जिनमें है असरदार:
1. लीवर की समस्याएं

छुई मुई लीवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। यह हेपेटाइटिस और फैटी लिवर जैसी स्थितियों में लाभकारी माना जाता है।

2. त्वचा रोग

एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह पौधा फोड़े-फुंसी, एक्जिमा और घावों पर लगाया जाए तो राहत मिलती है। छुई मुई की पत्तियों को पीसकर लेप की तरह लगाने से त्वचा पर जलन और खुजली में भी फायदा होता है।

3. महिलाओं की हार्मोनल समस्याएं

माहवारी अनियमितता, अत्यधिक रक्तस्राव जैसी समस्याओं में भी छुई मुई का चूर्ण लाभकारी माना जाता है। यह गर्भाशय को भी स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

कैसे करें उपयोग?

काढ़ा: छुई मुई की जड़ को उबालकर छान लें और दिन में एक बार सेवन करें।

चूर्ण: सूखी पत्तियों को पीसकर चूर्ण बना लें और सुबह-शाम शहद के साथ लें।

लेप: पत्तियों को पीसकर सीधे त्वचा पर लगाएं।

ध्यान दें: किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें।

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