बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने हाल ही में एक पुराने विवादित निर्णय पर खुलकर मलाल व्यक्त किया है। करीब 22 साल पहले की बात है, जब उन्होंने अपनी फिल्म Chalte Chalte की हीरोइन के चयन में बदलाव किया था। शुरुआत में इस फिल्म में ऐश्वर्य राय को कास्ट किया गया था, लेकिन बाद में उनका स्थान रानी मुखर्जी ने ले लिया। शाहरुख अब स्वीकार करते हैं कि इस बदलाव के पीछे सलमान खान से जुड़े कई दबाव और परिस्थितियाँ थीं, जिन्हें तबer वह ज्यादा बेहतर तरीके से संभाल सकते थे।
शाहरुख की प्राथमिक भूमिका निर्माता‑अभिनेता की थी, लेकिन फिल्म Chalte Chalte की निर्माण टीम में अन्य बहुत से सदस्य भी शामिल थे — प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, सह‑निर्माता — जिनकी सहमति भी इस तरह के फैसले में मायने रखती थी। उन्होंने कहा कि उस समय “मेरे हाथ बंधे हुए थे” क्योंकि प्रक्रिया पूरी तरह से केवल उनकी नहीं थी।
शाहरुख ने बताया कि निर्णय से जुड़े बदलावों ने केवल पहलुओं को प्रभावित नहीं किया, बल्कि उससे फिल्म की कहानी और प्रेम‑त्रिकोण की भावना में थोड़ा फेरबदल होना पड़ गया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ऐश्वर्य राय और सलमान खान के बीच उस दौर में जो निजी और पेशेवर सम्बन्ध थे, उन्होंने भी इस बदलाव में भूमिका निभाई।
उन्होंने यह कहा कि इस अनुभव से उन्होंने यह सीखा कि फिल्मों में किरदारों के चयन और कलाकारों के बीच तालमेल सिर्फ कला का हिस्सा नहीं है बल्कि उस फिल्म की आत्मा से जुड़ा मामला है। अगर निर्णय स्वतंत्र रूप से लिया जाता, तो हो सकता है कि Chalte Chalte के उस दृश्य और रोमांस की जो फिल्मी अनुभूति बनती, वह और भी गहरा होती।
फिल्म Chalte Chalte 2003 में रिलीज़ हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, लेकिन उस हीरोइन के बदलने का मामला वर्षों तक चर्चा में रहा। दर्शक और आलोचक अक्सर यह चर्चा करते रहे कि किस तरह से फिल्म का असर बदल जाता अगर कहानी में पहली हीरोइन बनी रहती। शाहरुख ने अभी हाल ही में इस मामले पर कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह उस दिन फैसला लेने वालों में से नहीं होना चाहते थे — लेकिन निर्माता और अन्य सदस्यों के कारण वह उस स्थिति में थे।
पिछले कुछ वर्षों में शाहरुख और सलमान के बीच रिश्ते में दरार और मिठास दोनों देखने को मिली है। इस तरह की स्वीकारोक्ति से यह संकेत मिलता है कि दोनों कलाकार अब अधिक परिपक्व दौर से गुजर रहे हैं। इस बारे में शाहरुख ने कहा है कि अब उन्हें समझ आता है कि अंतर‑वैयक्तिक दायित्व और व्यवसायिक दबावों के कारण कुछ निर्णय उन्हें उस समय सही लगे थे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि शायद थोड़ा और धैर्य और स्पष्ट संवाद हो सकता था।
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