कभी जिन विकसित देशों में भारतीयों समेत विदेशी टैलेंट को रेड कारपेट वेलकम मिलता था, वही देश अब कुशल प्रवासियों पर पाबंदियों की दीवारें खड़ी कर रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों की वीज़ा नीतियों में हाल के महीनों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। एक समय था जब ये देश विदेशों से कुशल इंजीनियर, डॉक्टर, आईटी प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप टैलेंट को आमंत्रित करते थे। लेकिन अब उन्हीं के खिलाफ सख्ती बढ़ती जा रही है।
इस बदले रुख के पीछे क्या वजहें हैं और भारत के लिए ये कैसे एक सुनहरा अवसर बन सकता है—आइए जानते हैं।
क्या बदल गया है अमीर देशों का रुख?
अभी तक पश्चिमी देश वैश्विक टैलेंट को आकर्षित करने की होड़ में थे। लेकिन बीते कुछ समय में उनके घरेलू हालातों ने यह तस्वीर पलट दी है। अब ये देश पहले अपनी आबादी को रोजगार देना चाहते हैं और बाहरी टैलेंट को एक “जोखिम” के रूप में देखने लगे हैं।
अमेरिका में H-1B वीज़ा की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दी गई है।
ब्रिटेन में वीज़ा फीस और स्वास्थ्य सरचार्ज में भारी बढ़ोतरी की गई है।
ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में स्किल्ड वीज़ा कैटेगरी की समीक्षा कर उसे सीमित कर दिया है।
कनाडा ने भी अप्रवासी छात्रों और कामगारों की संख्या पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं।
इन सभी कदमों का उद्देश्य एक ही है—देश के संसाधनों पर “विदेशियों का बोझ” कम करना।
तो क्या ग्लोबल टैलेंट की अहमियत खत्म हो रही है?
बिलकुल नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ एक “नीतिगत रुकावट” है, दीर्घकालिक रणनीति नहीं। तकनीकी, मेडिकल, AI और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अब भी ग्लोबल टैलेंट की भारी मांग है। लेकिन पॉलिटिकल प्रेशर और लोकल वोट बैंक की मजबूरी ने इन देशों को फिलहाल सख्ती की राह पर ला खड़ा किया है।
🇮🇳 भारत के लिए अवसर की घड़ी
जहां विकसित देश बाहरी दिमागों को सीमित कर रहे हैं, वहीं भारत के पास अब अपने टैलेंट को देश में ही बनाए रखने और ग्लोबल इनोवेशन हब बनने का मौका है। भारत के पास:
मजबूत तकनीकी और इंजीनियरिंग फोर्स
तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम
सरकार की PLI, डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं
और वैश्विक कंपनियों का भारत की ओर बढ़ता रुझान
यह समय है जब भारत “ब्रेन ड्रेन” की बजाय “ब्रेन गेन” की ओर कदम बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्री प्रो. का कहना है,
“विदेशों की बदलती नीति भारत जैसे देशों के लिए अवसर का संकेत है। अगर हम सही नीति, निवेश और बुनियादी ढांचे पर ध्यान दें, तो टैलेंट यहीं रुकेगा और यहीं वैश्विक स्तर पर योगदान देगा।”
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