बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी को फिल्म में इंडस्ट्री में 25 साल से भी ज्यादा वक्त हो चुका है. एक्ट्रेस ने अपने करियर की शुरुआत ‘राजा की आएगी बारात’ से की थी और उस दौरान उन्हें उनकी हाइट और आवाज दोनों के लिए काफी कुछ सुनना पड़ता था.
रानी मुखर्जी जल्द ही फिल्म ‘मिसेज चटर्जी बनाम नॉर्वे’ में नजर आने वाली हैं. इसी के प्रमोशन के सिलसिले में पहुंची रानी ने पिंकविला से बात की और अपने स्ट्रगल का याद किया. उन्होंने हाल ही में साझा किया कि कैसे उन्होंने केवल क्रिएटिव क्रिटिसिज्म की ओर ध्यान दिया न कि एक एजेंडा के तहत किए गए क्रिटिसिज्म की ओर.
रानी ने कहा, “अगर मैं वास्तव में विश्वास करती कि लोग मेरी आवाज के बारे में क्या सोचते हैं, तो मेरी आवाज लाखों लोगों द्वारा पसंद नहीं की जाती. अगर मैंने अपना पैर नीचे नहीं रखा होता और अपनी खुद की फिल्मों को डब नहीं किया होता … लोग आज मुझे मेरी आवाज से पहचानते हैं.
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खुद के लिए एक जगह बनाने वाली मुखर्जी ने अपनी शर्तों पर जीवन जिया है क्योंकि वह “अपना विश्वास बनाने और उस पर टिके रहने में विश्वास करती हैं. उनका कहना है कि वो इस बात से प्रभावित नहीं होती कि लोग क्या कहेंगे.
फिल्म उद्योग में महिलाओं के लिए चीजें कैसे बेहतर हुई हैं, इस पर टिप्पणी करते हुए, अभिनेता ने कहा, “चीजें बेहतर के लिए बदल रही हैं,” लेकिन उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोगों के लिए स्थिति अलग है. इस बीच, रानी मुखर्जी की अगली, श्रीमती चटर्जी बनाम नॉर्वे, हिट होगी सिनेमाघरों में 17 मार्च को.
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