प्रिंस नरूला ने एक्टर्स बनाम इन्फ्लुएंसर्स पर अपनी टिप्पणियों से जुड़े विवाद पर बात की है, और कहा है कि उनके शब्दों का गलत मतलब निकाला गया। IANS के साथ एक खास बातचीत में, *Bigg Boss 9* के विजेता और रियलिटी शो के अनुभवी कलाकार ने अपनी स्थिति साफ की। उनकी यह सफाई तब आई जब चल रहे रियलिटी शो *The 50* में उनकी टिप्पणियों ने बड़े पैमाने पर बहस और आलोचना को जन्म दिया था।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके बयान से बेवजह का विवाद खड़ा हुआ, तो प्रिंस ने कहा, “हाँ, ऐसा हुआ, क्योंकि लोगों ने इसका अलग-अलग मतलब निकाला।” उन्होंने समझाया कि वह सभी इन्फ्लुएंसर्स को निशाना नहीं बना रहे थे, बल्कि उनके बीच मौजूद विविधता को उजागर कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा, “मैं बस यह कहने की कोशिश कर रहा था कि इन्फ्लुएंसर्स कई तरह के होते हैं। कुछ लोग सचमुच लोगों को प्रेरित करते हैं, जबकि कुछ ऐसा कंटेंट बनाते हैं जिसमें कोई दम नहीं होता।”
उन्होंने विस्तार से बताया कि उनकी मुख्य चिंता यह है कि प्रतिभाशाली एक्टर्स को कभी-कभी सोशल मीडिया पर कम फॉलोअर्स होने की वजह से मौके नहीं मिल पाते, जबकि कुछ लोग सिर्फ ऊपरी या छोटे-छोटे वीडियो वाले कंटेंट के ज़रिए ही लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। प्रिंस ने IANS से कहा, “मेरी चिंता यह है कि प्रतिभाशाली एक्टर्स कभी-कभी मौके गंवा देते हैं क्योंकि उनके पास बहुत ज़्यादा फॉलोअर्स नहीं होते, जबकि दूसरे लोग सिर्फ ऊपरी कंटेंट के ज़रिए ही लोगों का ध्यान खींच लेते हैं।”
यह बहस *The 50* (एक हाई-स्टेक्स रियलिटी शो) के एक एपिसोड के दौरान शुरू हुई थी। उस एपिसोड में प्रिंस ने अपने साथी कंटेस्टेंट्स करण पटेल और रिद्धि डोगरा के साथ मिलकर, मेनस्ट्रीम एंटरटेनमेंट में YouTubers और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की बढ़ती घुसपैठ की आलोचना की थी। खबरों के मुताबिक, प्रिंस ने कहा था कि इन्फ्लुएंसर्स ने इंडस्ट्री की अहमियत को “खत्म” या कम कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनमें से कई लोग “12 सेकंड से ज़्यादा एक्टिंग नहीं कर सकते।” करण पटेल ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा, “गधे घोड़ों की रेस में दौड़ा दिए” (यह ऐसा है जैसे घोड़ों की रेस में गधों को दौड़ा दिया जाए)। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक एक्टर्स को वायरल वीडियो और फोन की आसानी के बिना ज़्यादा संघर्ष करना पड़ता था।
इन टिप्पणियों के बाद ऑनलाइन ज़बरदस्त विरोध शुरू हो गया। कई लोगों ने इन टीवी एक्टर्स पर जलन और ‘गेटकीपिंग’ (यानी दूसरों को इंडस्ट्री में आने से रोकने) का आरोप लगाया। कुछ इन्फ्लुएंसर्स और साथी कंटेस्टेंट्स ने डिजिटल क्रिएटर्स का बचाव करते हुए उन्हें मेहनती और अपनी मेहनत से आगे बढ़ने वाले लोग बताया।
प्रिंस की यह सफाई उनकी पिछली टिप्पणियों को और ज़्यादा बारीकी से समझाने की एक कोशिश है। इसके ज़रिए उन्होंने ऐसे क्रिएटर्स के बीच फर्क किया है जिनका कंटेंट दमदार होता है, और ऐसे क्रिएटर्स के बीच जिनका कंटेंट उन्हें खोखला लगता है। साथ ही, उन्होंने सोशल मीडिया से चलने वाली इस इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे प्रशिक्षित एक्टर्स के प्रति अपनी सहानुभूति भी ज़ाहिर की है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय मनोरंजन जगत में ‘टीवी बनाम डिजिटल क्रिएटर्स’ की पुरानी बहस को एक बार फिर से हवा दे दी है।
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