आम आदमी को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आने वाले दो वर्षों में देशभर में हजारों नए “प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र” खोले जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य है कि नागरिकों को महंगी ब्रांडेड दवाओं के विकल्प के रूप में कम कीमत पर जनरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें — और वह भी उनके घर के पास ही।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, जन औषधि केंद्रों की संख्या को 2027 तक 25,000 से अधिक ले जाने की योजना है। अभी देशभर में करीब 10,000 जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
क्या है जन औषधि योजना?
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी, लेकिन इसे व्यापक रूप से 2015 के बाद विस्तार मिला। इस योजना के तहत सरकार गुणवत्ता वाली जनरिक दवाएं उपलब्ध कराती है, जिनकी कीमत ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक कम होती है।
जन औषधि केंद्रों से मिलने वाली दवाएं, परीक्षण और गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरती हैं। WHO और CDSCO जैसे संस्थानों की स्वीकृति प्राप्त इन दवाओं को लेकर आम जनता का भरोसा भी बढ़ा है।
लक्ष्य: हर जिले में पहुंच और हर नागरिक के लिए सुविधा
सरकार का लक्ष्य है कि हर 2-3 किलोमीटर के दायरे में एक जन औषधि केंद्र हो, ताकि विशेष रूप से बुज़ुर्ग, महिलाएं और निम्न आय वर्ग के लोग इनका लाभ उठा सकें। नई नीति के तहत:
पीपीपी मॉडल (Public-Private Partnership) को बढ़ावा दिया जा रहा है
युवाओं, बेरोजगारों और फार्मासिस्टों को केंद्र खोलने के लिए आर्थिक सहायता और इंसेंटिव दिए जा रहे हैं
ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र खोलने पर अधिक प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है
ई-दवा प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन दवा उपलब्धता की योजना भी प्रारंभिक चरण में है
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
महंगी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच जन औषधि केंद्र एक राहत के रूप में सामने आए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में जन औषधि केंद्रों से खरीदारी करने से देशभर के नागरिकों को करीब ₹20,000 करोड़ की बचत हुई है। यह आंकड़ा आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ने की संभावना है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “जन औषधि योजना सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है, यह स्वास्थ्य को सुलभ और सस्ता बनाने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का हिस्सा है।”
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