आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई के आरोप में गिरफ्तार किए गए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार को सोमवार को जमानत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए बिभव को जमानत दे दी कि वह 100 से अधिक दिनों से हिरासत में हैं। हालांकि, कोर्ट ने बिभव कुमार की जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाईं हैं।
बिभव गवाहों और सबूतों को प्रभावित ना कर सकें, यह सुनिश्चित करने के लिए जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने जो बड़ीं शर्तें लगाईं उनमें एक यह भी शामिल है कि केजरीवाल के घर में अब उनके लिए ‘नो एंट्री’ है। बेंच ने कहा कि जमानत अवधि के दौरान बिभव कुमार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पीए नहीं बनाया जा सकता है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बिभव कुमार को कोई आधिकारिक काम सौंपने पर भी रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने कहा कि जब तक सभी गवाहों का परीक्षण नहीं हो जाता है बिभव मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर नहीं जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता (बिभव कुमार) केस को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के दौरान ट्रायल कोर्ट की ओर से लगाए जाने वाली शर्तों का भी पालन करना होगा।
आप की सांसद स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया था कि बिभव कुमार ने 13 मई को केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर उन्हें बुरी तरह पीटा था। गैर इरादतन हत्या के प्रयास समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत 16 मई को उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस ने बिभव को 18 मई को गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले हाई कोर्ट ने बिभव की जमानत याचिका को यह कहकर ठुकरा दिया था कि वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं और गवाहों-सबूतों को प्रभावित करने की आशंका को खारिज नहीं किया ज सकता है।
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