पटना (एजेंसी/वार्ता): बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी पर अपना कड़ा रुख दोहराते हुए स्पष्ट कर दिया कि जहरीली शराब कांड के पीड़ितों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। कुमार ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा में भोजनावकाश से पहले विपक्ष के हंगामे में हस्तक्षेप करते हुए शराब के सेवन को निंदनीय बताया और कहा कि जहरीली शराब के सेवन से मौत होने पर मुआवजा देना गलत है।
उन्होंने बापू, विभिन्न धर्मों और विचारधाराओं का जिक्र करते हुए कहा कि शराब के सेवन को कहीं भी जायज नहीं ठहराया गया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नाम लिए बगैर कहा कि जो लोग शराबबंदी के समर्थन में थे वे अब इसके खिलाफ बोल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने ही राज्य में शराबबंदी को सख्ती से लागू किया है। देश में जिस व्यक्ति का शासन है, उसके राज्य में शराबबंदी की स्थिति सभी को पता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद वर्ष 2017 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी की प्रशंसा की थी लेकिन अब उनके साथ संबंध तोड़ने के बाद वे इसके खिलाफ बोल रहे हैं। कुमार ने कहा कि जहरीली शराब से हुई मौत से साबित होता है कि शराब का सेवन गलत था।
उन्होंने सदस्यों से कहा कि वे लोगों को इसका सेवन न करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि पहले अपनी आजीविका के लिए शराब के कारोबार में लगे गरीब परिवारों को अब एक लाख रुपये और अधिक की सहायता दी जा रही है ताकि वे अन्य व्यवसायों से जुड़ सकें।
उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी के खिलाफ बोलकर भाजपा उन गरीब लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है, जिनका जीवन स्तर शराबबंदी के बाद से बदल गया है और वे शांति से रह रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई शराब पीता है तो वह मर जाएगा क्योंकि यह नकली हो सकता है। उन्होंने लोगों से शराब का सेवन न करने की अपील की। उन्होंने सारण जिले में जहरीली शराब कांड को लेकर भाजपा सदस्यों के हंगामे की निंदा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत भाजपा शासित राज्यों में हो रही जहरीली शराब की घटनाओं पर कोई बात नहीं हो रही है।
-एजेंसी/वार्ता
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