नयी दिल्ली (एजेंसी/वार्ता): राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने जहरीली शराब त्रासदी से बिहार के अन्य जिलों में हुई मौतों के मद्देनजर मौके पर जांच के लिए शनिवार को अपने एक सदस्य के नेतृत्व में अपनी टीम को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया। आयोग ने कहा कि यह जानना चिंतित है कि इन पीड़ितों को कहां और किस तरह का चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है।
आयोग ने कहा कि इनमें से ज्यादातर गरीब परिवारों से है और निजी अस्पतालों में महंगा उपचार नहीं करा सकते है। इसलिए राज्य सरकार के लिए जरुरी है कि जहां कहीं भी उपलब्ध हो वह इन लोगों को संभावित बेहतर चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराए। आयोग ने कहा कि वह राज्य सरकार द्वारा दी गई राहत और पुनर्वास के बारे में और राज्य भर में अवैध शराब बनाने वाले हॉट स्पॉट को खत्म करने के लिए किए गए या किए जाने वाले उपायों के बारे में जानना चाहता है।
एनएचआरसी ने कहा कि इस मामले में एक और स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने 15 दिसंबर को पहले की मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए सारण जिले में जहरीली शराब त्रासदी में कई मौतों का आरोप लगाते हुए अपने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के माध्यम से कई लोगों और परिवारों को प्रभावित करने वाली घटना में चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बिहार सरकार से पूछा था।
-एजेंसी/वार्ता
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