यूरिक एसिड से राहत चाहिए? आजमाएं ये 5 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण यूरिक एसिड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया जैसी शिकायतें आम होती जा रही हैं। यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर शरीर में यूरेट क्रिस्टल जमा होने लगते हैं, जो मुख्य रूप से जोड़ों में तेज दर्द और सूजन का कारण बनते हैं।

आधुनिक चिकित्सा में जहां दवाओं द्वारा इसका प्रबंधन किया जाता है, वहीं आयुर्वेद में कुछ ऐसी जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है, जो न केवल यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में मददगार हैं, बल्कि इसके मूल कारण को भी जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती हैं।

आइए जानते हैं ऐसी ही 5 प्रभावशाली जड़ी-बूटियों के बारे में, जो यूरिक एसिड से प्राकृतिक राहत दिला सकती हैं।

1. गिलोय (Tinospora Cordifolia)

गिलोय को आयुर्वेद में ‘अमृता’ कहा गया है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक है और यूरिक एसिड को नेचुरली कम करने की क्षमता रखती है। नियमित रूप से गिलोय का काढ़ा पीने से सूजन और जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है।

2. पुनर्नवा (Boerhavia Diffusa)

पुनर्नवा एक मूत्रवर्धक जड़ी-बूटी है, जो किडनी को सक्रिय कर शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करती है। इसके नियमित सेवन से यूरिक एसिड का स्तर संतुलित रहता है।

3. नीम की पत्तियां

नीम में एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं। यह खून को साफ करने के साथ-साथ यूरिक एसिड के कणों को भी तोड़ने का काम करती है। नीम की चाय या उसकी पत्तियों का रस लाभकारी माना जाता है।

4. हरितकी (Haritaki)

त्रिफला की प्रमुख घटक हरितकी पाचन सुधारने के साथ-साथ शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। यह यूरिक एसिड को घटाने में भी सहायक है, खासकर जब कब्ज या पाचन से जुड़ी समस्याएं कारण हों।

5. मेथी (Fenugreek Seeds)

मेथी के बीजों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करते हैं। रातभर भिगोए हुए मेथी दानों का सेवन या इसका पाउडर उपयोगी होता है।

बचाव के कुछ जरूरी उपाय

केवल जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहना काफी नहीं है। यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

अधिक पानी पिएं, ताकि विषाक्त तत्व बाहर निकल सकें

रेड मीट, समुद्री भोजन, शराब और हाई-प्रोटीन डाइट से परहेज करें

वजन को नियंत्रित रखें

नियमित व्यायाम करें

डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर यूरिक एसिड की जांच कराएं

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