मिनी ट्रेड डील या टैरिफ की वापसी? फैसला अब अमेरिका के पाले में

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर फैसला अब अमेरिका को लेना है, क्योंकि भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए नहीं खोलेगा।

सरकारी सूत्रों का कहना है, “हमने अपनी सीमाएं तय कर दी हैं, अब गेंद अमेरिका के पाले में है।” यदि अमेरिका भारत की इस शर्त को स्वीकार करता है, तो 9 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौता संभव है।

📌 26% टैरिफ की वापसी का खतरा बरकरार
यदि यह डील नहीं होती, तो 26% अमेरिकी टैरिफ फिर से लागू हो जाएंगे।
2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर जवाबी टैरिफ लगाया था, जिसमें भारत पर 26% का शुल्क शामिल था। हालांकि, इसे 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया ताकि नए व्यापार समझौते की संभावना तलाशी जा सके।

अब यह 90 दिन की डेडलाइन 9 जुलाई को खत्म हो रही है, और भारत पूरी छूट की मांग पर अड़ा है।

🕊️ ‘मिनी डील’ से पहले, बड़ी डील की जमीन तैयार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत की घोषणा की थी, जिसे सितंबर-अक्तूबर 2025 तक अंतिम रूप देने की योजना है।
इससे पहले, दोनों देश अस्थायी टैरिफ टकराव से निपटने के लिए इंटरिम डील की ओर बढ़ रहे हैं।

💬 गोयल: भारत के लिए देशहित पहले
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 4 जुलाई को साफ कहा कि भारत किसी समयसीमा के दबाव में आकर कोई व्यापार समझौता नहीं करेगा।

“भारत किसी डील को तभी मानेगा जब वह पूरी तरह देश के हित में हो,” उन्होंने कहा।
“मुक्त व्यापार समझौता तभी संभव है जब वह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो।”

🌾 भारत का कृषि और डेयरी क्षेत्र रहेगा प्रतिबंधित
भारत ने अब तक किसी भी देश के साथ हुए व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र को नहीं खोला है।
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका से वार्ता के दौरान भी भारत ने स्पष्ट कर दिया कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को आने की अनुमति देना, देश के करोड़ों किसानों की आजीविका के लिए खतरा हो सकता है।

भारत की ओर से यह ‘अटल रेखा’ है, और सरकार इसमें कोई छूट नहीं देने के मूड में नहीं है।

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