छींक आना बहुत ही नॉर्मल बात है. लेकिन इसको लेकर कुछ लोगों के मन में यह धारणा है कि जब भी छींक आती है तो दिल की धड़कन कुछ समय के लिए रुक जाती है. मगर क्या यह सच है या सिर्फ एक मिथ है?आइये जानते है।
कई लोगों को लगता है कि छींकते वक्त दिल का धड़कना बंद हो जाता है. हालांकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. छींकने से पहले जब आप सांस अपने अंदर लेते हैं तो आपके सीने में दबाव बढ़ जाता है. इसके बाद आप जैसे ही छींक के दौरान जोर से सांस छोड़ते हैं तो सीने का दबाव कम हो जाता है.
दरअसल नाक में ‘म्यूकस’ नाम की एक पतली झिल्ली होती है. इस झिल्ली के सेल्स और टिशूज़ दोनों ही बहुत ज्यादा सेंसेटिव होते हैं. जब इन टिशूज़ या फिर सेल्स में सांस लेते वक्त धूल का कोई कण आकर चिपक जाता है तब नाक में अजीबोगरीब गुदगुदी शुरू हो जाती है, जो छींक का कारण बनती है. नाक में किसी भी तरह की इरिटेशन से छींक आ सकती है.
खाना बनाने के दौरान मसालों के नाक में अंदर जाने पर भी छींक आती है. इसके अलावा, झाड़ू लगाते समय धूल के कण अंदर जाने पर छींक आ जाती है. जब भी नाक के अंदर की झिल्ली किसी कण को लेकर असहज महसूस करती है तो तुरंत छींक के जरिए इसे बाहर निकाल देती है.
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