गर्मियों में गन्ने का जूस ठंडे पेय के रूप में देखा जाता है. यह बॉडी में पानी की पूर्ति करता है, साथ ही आयरन, मिनरल्स समेत कई पोषक तत्व प्रदान करता है. इसके अनेक फायदे हैं. गन्ना बेहद मीठा होता है. इसमें चीनी, नमक, नींबू ओर बर्फ को मिलाकर जूस तैयार किया जाता है. चूंकि गन्ना टेस्ट में मीठा होता है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि शुगर पेशेंट को गन्ने का जूस पीना चाहिए या नहीं. क्या गन्ने का जूस ब्लड मेें शुगर लेवल बढ़ा सकता है. यह डायबिटिक पेशेंट को नुकसान करता है या इसके कुछ फायदे भी हैं. आइये यही जानने की कोशिश करते हैं.
गन्ने के रस में पूरी तरह चीनी नहीं होती है. यदि इसका अनुपात देखें तो इसमें 70 से 75 प्रतिशत तक पानी होता है. 15 प्रतिशत तक फाइबर और करीब 15 प्रतिशत चीनी की मात्रा होती है. गन्ने के जूस को प्रोसेस्ड प्रक्रिया से नहीं गुजारा जाता है, इसलिए इसमें फेनॉलिक और फ्लेववॉइड एंटी ऑकिसीडेंट्सखूब पाए जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्वों के लिए अलावा पोटैशियम भी मिलता है, इसलिए ही गन्ने का जूस पीने से डिहाइड्रेशन नहीं होता है.
करीब 240 एमएल गन्ने का जूस लेने पर उसमें चीनी की मात्रा देखी जाए तो 50 ग्राम तक होती है. कैलोरी 183 और फाइबर 13 ग्राम तक पाया जाता है. गन्ने में प्रोटीन और फैट नदारद होता है. जानकारों का कहना है कि 240 एमएल गन्ने का जूस एक कप में आ जाता है. इसमेें चीनी की मात्रा 50 ग्राम यानि 50 ग्राम यानि 12 चम्मच के बराबर होता है. वहीं, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का कहना है कि पुरुषों को अधिकतम 9 चम्मत और महिलाओं को 6 चम्मच चीनी खानी चाहिए.
चीनी बॉडी में ग्लूकोज बढ़ाने का काम करती है. इसुलिन सही ढंग से न होने का कारण ग्लूकोज नियंत्रण नहीं रह पाता है. इसलिए डायबिटीज के पेशेंट को चीनी युक्त ड्रिंक्स नहीं पीने की सलाह दी जाती है. चीनी की वजह से बॉडी में शुगर लेवल बहुत तेजी से बढ़ सकता है.
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