चने को आप दालों का राजा कह सकते हैं. हम यहां देसी चने की बात कर रहे हैं, जिसे आप कई तरह से अपने भोजन में शामिल करते हैं. जैसे, हरा चना सब्जी के रूप में खाया जाता है. पका हुआ काला चना उबालकर नाश्ते में या फिर स्प्राउट्स बनाकर खाया जाता है और इसी चने को भूनकर स्नैक्स के रूप में भी खाया जाता है.
प्रोटीन यानी मांस तत्व, जिसके बिना इंसान का शरीर ना तो विकसित हो सकता है और ना ही डेली लाइफ में चलने-फिरने का काम कर सकता है. चना सेहत के लिए गुणकारी है यह बात ज्यादातर लोग जानते हैं. लेकिन यदि आप अपने शरीर की जरूरत के अनुसार, चने की सही फॉर्म का यानी रूप का चुनाव ना करें तो चना लाभ की जगह हानि पहुंचा सकता है.
चने के महत्व के बारे में बात करते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य सुरेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं कि ‘यदि किसी व्यक्ति के शरीर में सूजन की समस्या है तो उसे भुना हुआ चना खाना चाहिए. लेकिन यदि किसी व्यक्ति के शरीर में रूखापन अधिक है तो उसे उबला हुआ चना खाना चाहिए.
आयुर्वेद के अनुसार, जिन लोगों के शरीर में इंफ्लेमेशन की समस्या होती है या किसी भी कारण से चेहरे पर सूजन, शरीर के अन्य अंगों पर सूजन की समस्या हो रही है, यदि ये उबले हुए तने या स्प्राउट्स के रूप में देसी चने का उपयोग करेंगे तो इनकी शरीर में सूजन बढ़ सकती है. इस समस्या की कई मेडिकल वजह होती हैं.
ठीक इसी तरह जिन लोगों की स्किन बहुत अधिक रूखी रहती है, हर समय ड्राइनेस से परेशान रहते हैं, शरीर में पानी की कमी की समस्या है, हाइड्रेशन का अभाव है, इन लोगों को भुने हुए चने का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से इन्हें समस्या अधिक बढ़ सकती है. इन्हें देसी चने उबालकर या इन इनके स्प्राउट्स बनाकर खाने चाहिए.
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