डायबिटीज एक ऐसी समस्या है, जिसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इस समस्या से ग्रसित मरीजों को जीवनभर कई तरह के प्रतिबंधों से गुजरना पड़ता है. खासतौर पर खानपान को लेकर उन्हें सजग रहना पड़ता है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो ब्लड में शुगर की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है, जिसके कारण कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है. हेल्थ एक्सपर्ट अक्सर डायबिटीज रोगियों को लो ग्लाइसिमेक इंडेक्स फूड का सेवन करने की सलाह लेते हैं. साथ ही इस समस्या से ग्रसित मरीजों को मीठा खाने के लिए भी मना किया जाता है. खासतौर पर चीनी को बिल्कुल ही बंद कर दिया जाता है. ऐसे में मीठे का अन्य विकल्प शहद और गुड़ का सेवन कई लोग करते हैं.
हम में से अधिकतर लोग डायबिटीज मरीजों के लिए गुड़ को चीनी से अधिक हेल्दी और सही मानते हैं, लेकिन आपको बता दें कि असल में डायबिटीज मरीजों को गुड़ के सेवन से भी बचना चाहिए. क्योंकि गुड़ से भी डायबिटीज में इंसुलिन का स्तर प्रभावित होता है. दरअसल, चीनी और गुड़ दोनों गन्ने से प्राप्त होते हैं. इससे साफ है कि चीनी और गुड़ दोनों का ही ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई हो सकता है. वहीं, डायबिटीज रोगियों को अपने डाइट में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्ट फूड को शामिल करना चाहिए.
शहद एक नेचुरल शुगर और कार्बोहाइड्रेट है, लेकिन यह डाबिटीज मरीजों के लिए हेल्दी माना जाता है. 2004 में हुए एक रिसर्च में देखा गया है कि व्हाइट शुगर की तुलना में ब्लड शुगर के स्तर पर शहद का प्रभाव अधिक फायदेमंद होता है.
शहद और गुड़ दोनों ही ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाते हैं, लेकिन शहद का सेवन डायबिटीज मरीजों के लिए अधिक हेल्दी हो सकता है. क्योंकि इनमें सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं. इसके अलावा गुड़ में मैग्नीशियम, कॉपर और आयरन की भी प्रचुरता होती है. वहीं, शहद विटामिन बी, विटामिन सी और पोटैशियम से भरपूर होता है, जो गुड़ से अधिक फायदेमंद हो सकती है.
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