अगर आपकी त्वचा बिना किसी स्पष्ट कारण के धीरे-धीरे काली पड़ने लगी है या पहले की तुलना में रंगत में बदलाव दिख रहा है, तो यह सिर्फ सूरज की किरणों का असर नहीं हो सकता। हाल ही में आई एक शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमारी कुछ रोजमर्रा की आदतें और रूटीन में शामिल कुछ आम चीजें त्वचा की प्राकृतिक चमक को बिगाड़ सकती हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो दो प्रमुख चीजें, जिन्हें हम दैनिक जीवन में बार-बार उपयोग करते हैं, त्वचा की कालिमा और दाग-धब्बों का मुख्य कारण बन रही हैं। अगर इन्हें समय रहते रोका जाए, तो त्वचा की सेहत और रंगत दोनों को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
1. अधिक मात्रा में शुगर (चीनी) का सेवन
अत्यधिक मीठा सिर्फ वजन और डायबिटीज़ का कारण नहीं बनता, बल्कि यह आपकी त्वचा की सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। रिसर्च में पाया गया है कि चीनी शरीर में ग्लाइकेशन (Glycation) की प्रक्रिया को बढ़ाती है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें शुगर, त्वचा में मौजूद प्रोटीन (जैसे कोलेजन और इलास्टिन) से जुड़कर उनकी गुणवत्ता को कम कर देती है।
नतीजा यह होता है कि त्वचा की लचीलापन घटने लगता है, समय से पहले झुर्रियां आती हैं और रंगत गहरी व मुरझाई हुई दिखती है। इसके अलावा, शुगर त्वचा में सूजन (inflammation) को बढ़ाकर पिगमेंटेशन को भी बढ़ावा देती है।
2. केमिकल बेस्ड स्किनकेयर उत्पादों का अधिक प्रयोग
आज बाजार में उपलब्ध कई सौंदर्य प्रसाधन और स्किन केयर उत्पादों में तेज रसायन होते हैं, जो शुरुआत में त्वचा को गोरा और चमकदार दिखाते हैं, लेकिन दीर्घकालिक उपयोग से यह त्वचा की प्राकृतिक नमी और तेल को नष्ट कर देते हैं।
हाइड्रोक्विनोन, स्टेरॉयड और पैराबेन जैसे रसायन लम्बे समय तक इस्तेमाल किए जाने पर त्वचा को पतला, संवेदनशील और काला बना सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन उत्पादों को बिना त्वचा विशेषज्ञ की सलाह के लगातार इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है।
क्या करें बचाव के लिए?
शुगर का सेवन सीमित करें: प्रोसेस्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक, डेज़र्ट और मिठाइयों की मात्रा घटाएं।
प्राकृतिक स्किनकेयर अपनाएं: एलोवेरा, हल्दी, चंदन और गुलाब जल जैसे घरेलू विकल्पों को प्राथमिकता दें।
सनस्क्रीन का नियमित प्रयोग करें: सूरज की UV किरणें भी पिगमेंटेशन बढ़ा सकती हैं।
पर्याप्त पानी पिएं और डिटॉक्स फूड खाएं: ताकि त्वचा अंदर से स्वस्थ रह सके।
त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लें: खासकर यदि पिगमेंटेशन लगातार बढ़ रहा हो।
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