अस्थमा और सांस से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए रात का समय सबसे ज्यादा मुश्किल भरा होता है। जैसे ही मरीज लेटता है, सांस फूलना, सीने में जकड़न और खांसी की शिकायत बढ़ जाती है, जिससे नींद बार-बार टूटती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात में हवा की नमी, धूल के कण और गलत सोने की मुद्रा अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि अस्थमा के मरीजों को सोने से पहले अपने कमरे का खास ध्यान रखना चाहिए। कमरे में धूल जमा न होने दें, चादर और तकिए के कवर नियमित रूप से धोते रहें और ज्यादा ठंडे वातावरण से बचें। इसके अलावा, सिर को थोड़ा ऊंचा रखकर सोने से सांस लेने में आसानी होती है और खांसी कम हो सकती है।
कुछ नेचुरल उपाय भी अस्थमा मरीजों को रात में राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। गुनगुना पानी पीना, भाप लेना और सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करना फेफड़ों को रिलैक्स करने में सहायक माना जाता है। कई लोग शहद और अदरक के मिश्रण को भी लाभकारी मानते हैं, क्योंकि यह गले को आराम देता है और खांसी को शांत करता है।
आयुर्वेदिक जानकारों के अनुसार, तुलसी, हल्दी और मुलेठी जैसी जड़ी-बूटियां सांस से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकती हैं। हालांकि इनका इस्तेमाल दवा की जगह नहीं, बल्कि सहायक उपाय के रूप में किया जाना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीना और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना भी अस्थमा के लक्षणों को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर रात में बार-बार सांस घुटने की समस्या हो, तेज खांसी या सीने में दर्द बना रहे, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह अस्थमा के गंभीर लक्षण हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, सही आदतें, साफ वातावरण और कुछ नेचुरल उपाय अपनाकर अस्थमा मरीज रात की नींद को बेहतर बना सकते हैं। लेकिन किसी भी नए उपाय को अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है, ताकि सेहत को नुकसान न पहुंचे और बीमारी नियंत्रण में रहे।
Business Sandesh Indian Newspaper | Articles | Opinion Pieces | Research Studies | Findings & News | Sandesh News