प्रेग्नेंसी में आयरन की कमी: मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक, विशेषज्ञों से जानिए बचाव के उपाय

गर्भावस्था एक महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान मां के शरीर को कई पोषक तत्वों की अतिरिक्त आवश्यकता होती है, जिनमें आयरन सबसे अहम है। हालांकि, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार भारत में हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रही है। इस स्थिति में शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है, जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आयरन की कमी गर्भावस्था में कई तरह की जटिलताओं का कारण बन सकती है, जिनमें समय से पहले प्रसव, कम वजन का बच्चा और मां की प्रसव के समय मृत्यु तक का जोखिम शामिल है।

आयरन की जरूरत क्यों होती है ज़्यादा?

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में खून की मात्रा लगभग 50% तक बढ़ जाती है, जिससे भ्रूण को पोषण मिल सके। ऐसे में शरीर को अधिक आयरन की जरूरत होती है ताकि पर्याप्त हीमोग्लोबिन बन सके, जो ऑक्सीजन को शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाता है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं:

“आयरन की कमी से न केवल मां को थकान, कमजोरी और चक्कर आते हैं, बल्कि भ्रूण को भी पूरा ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। यह उसकी विकास प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।”

गर्भावस्था में आयरन की कमी के प्रमुख लक्षण

लगातार थकान और कमजोरी

चेहरे और होठों पर पीलापन

सांस फूलना या चक्कर आना

दिल की धड़कन तेज होना

सिरदर्द या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई

हाथ-पैरों में ठंडक महसूस होना

मां और बच्चे पर इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं?
मां पर प्रभाव:

समय से पहले प्रसव

अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा

प्रसव के समय संक्रमण की संभावना

पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसव के बाद का मानसिक तनाव)

शिशु पर प्रभाव:

जन्म के समय कम वजन

मानसिक और शारीरिक विकास में देरी

इम्यूनिटी कमजोर होना

शिशु में भी एनीमिया की संभावना

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO दोनों ही गर्भवती महिलाओं को 100 से 120 मिलीग्राम आयरन प्रतिदिन लेने की सलाह देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि खानपान के साथ-साथ आयरन सप्लीमेंट्स और फोलिक एसिड की गोलियां लेना भी जरूरी है, खासकर तब जब टेस्ट में आयरन की कमी पाई जाए।

गायनोकोलॉजिस्ट कहती हैं:

“आयरन की गोलियों के सेवन से पहले ब्लड टेस्ट जरूर कराना चाहिए। अनियंत्रित सेवन से कब्ज, गैस या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टर की सलाह से लिया गया आयरन शरीर को सही मात्रा में मिलता है और असरदार भी होता है।”

आयरन युक्त आहार में क्या शामिल करें?

हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, बथुआ, सरसों)

गुड़ और चना

काले तिल और मेथी

अनार, चुकंदर और सेब

सूखे मेवे जैसे किशमिश, खजूर, बादाम

दालें और साबुत अनाज

आयरन को शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित करने के लिए विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ (नींबू, संतरा, आंवला) का सेवन करें।

क्या बचाव संभव है?

बिलकुल। गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के दौरान नियमित ब्लड टेस्ट करवाकर आयरन की स्थिति पर नज़र रखें। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और समय पर डॉक्टर से जांच ही इसका सबसे बेहतर समाधान है।

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